Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » शर्मिला धनखड़: घरेलू हिंसा से राष्ट्रमंडल स्वर्ण पदक तक की प्रेरणादायक यात्रा
    Breaking News Headlines अपराध खेल राष्ट्रीय

    शर्मिला धनखड़: घरेलू हिंसा से राष्ट्रमंडल स्वर्ण पदक तक की प्रेरणादायक यात्रा

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 28, 2026No Comments4 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    शर्मिला धनखड़
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    लेखक: अपराजिता उपाध्याय

    ग्लास्गो, 28 जुलाई (भाषा) घरेलू हिंसा और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने वाली पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने 37 दिन की नवजात बेटी के साथ घर से निकाले जाने के दर्दनाक दौर को पीछे छोड़ते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर संघर्ष की मिसाल कायम की।

    वर्षों तक घरेलू हिंसा की यातना झेलना उनके लिए एक नई शुरुआत का कारण बनी। उस समय पोलियो से प्रभावित और मानसिक रूप से टूट चुकी शर्मिला को यह नहीं पता था कि जिंदगी उन्हें किस मुकाम तक ले जाएगी लेकिन एक दशक से अधिक समय बाद 40 वर्षीय शर्मिला ने राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं की एफ-57 वर्ग की गोला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

    शर्मिला ने पीटीआई से बातचीत में अपने पहले पति के साथ बिताए कठिन दिनों को याद करते हुए कहा, ‘‘सब लोग कहते थे कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा, इसलिए मैं लंबे समय तक सब कुछ सहती रही।’’

    उन्होंने आरोप लगाया कि उनका पहला पति शराब का आदी था, कोई काम नहीं करता था और घर का सामान बेच देता था। दो बेटियों के जन्म पर वह उन्हें बेरहमी से पीटता था। यहां तक कि उनकी बड़ी बेटी भी घरेलू हिंसा का शिकार हुई।

    शर्मिला ने कहा, ‘‘मेरे (पहले) पति की कोई आमदनी नहीं थी। वह घर का सामान बेच देता था। दो बेटियां होने की वजह से मुझे मारता था और मेरी बड़ी बेटी को भी पीटता था।’’

    शर्मिला धनखड़ का संघर्ष और स्वर्णिम सफलता

    उन्होंने बताया, ‘‘जब मेरी दूसरी बेटी पैदा हुई तो वह बड़ी बेटी को भी मारने लगा। छोटी बेटी सिर्फ 37 दिन की थी, तभी उसने हमें घर से निकाल दिया। इसके बाद मेरा परिवार मुझे अपने साथ ले आया और मेरा तलाक करा दिया।’’

    दोनों बेटियों के साथ मायके लौटने के बाद शर्मिला ने अगले छह वर्षों तक संघर्ष करते हुए अपनी जिंदगी को दोबारा संवारने की कोशिश की।

    उन्हें हालांकि मुश्किलों का सामना शादी से बहुत पहले से करना पड़ रहा था। दो वर्ष की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया था, जिससे उनका दाहिना पैर हमेशा के लिए प्रभावित हो गया।

    उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं दो साल की थी, तब मुझे पोलियो हो गया। बुखार का इंजेक्शन लगाने के बाद मेरा दाहिना पैर प्रभावित हो गया।”

    शर्मिला का बचपन भी आर्थिक तंगी में बीता। उनकी मां दृष्टिबाधित थीं और उनकी शादी अपने से 20 वर्ष बड़े व्यक्ति से हुई थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उनके माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी।

    उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘‘घर में आर्थिक दिक्कतें थीं, लेकिन माता-पिता ने हमें पढ़ाया। पहली से दसवीं कक्षा तक मैं कभी दूसरे स्थान पर नहीं आई, हर परीक्षा में अव्वल रही।’’

    आर्थिक तंगी के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई और कम उम्र में उनकी शादी कर दी गई।

    उनके जीवन में असली बदलाव दूसरी शादी के बाद आया।

    शर्मिला ने बताया, ‘‘मेरे दूसरे पति ने ही मुझे खेलों से परिचित कराया। उनके पास जो भी था, उन्होंने मेरी खेल यात्रा पर लगा दिया।’’

    जब आर्थिक संसाधन कम पड़े तो उनकी मां ने भी अपनी जमीन बेचकर उनका साथ दिया।

    कोच टेक चंद ( 2018 एशियाई पैरा खेलों में बैठकर गोला फेंक स्पर्धा के कांस्य पदक विजेता रह चुके हैं) ने शर्मिला की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें इस स्पर्धा में आगे बढ़ाया।

    शुरुआत में शर्मिला को खुद भी भरोसा नहीं था कि वह कभी बड़ा खिताब जीत पाएंगी।

    उन्होंने कहा, ‘‘शुरुआत में मुझे कभी नहीं लगा था कि मैं जीत सकती हूं।’’

    उनका आत्मविश्वास हर प्रतियोगिता के साथ बढ़ता गया। 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में वह चौथे स्थान पर रहीं, इस वर्ष फज्जा अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और अब ग्लासगो में राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाकर अपने संघर्ष को ऐतिहासिक सफलता में बदल दिया।

    यह जीत सिर्फ एक स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के विश्वास और समर्थन की जीत भी थी, जिन्होंने उनके सबसे कठिन समय में उनका साथ दिया।

    आज उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी दोनों बेटियां हैं। 15 वर्षीय बड़ी बेटी भाला फेंक खिलाड़ी है, जबकि 12 वर्षीय छोटी बेटी लंबी कूद में अपना भविष्य बना रही है।

    शर्मिला ने गर्व से कहा, ‘‘मेरी बेटियों ने मुझसे कहा है कि भारत में होने वाले अगले राष्ट्रमंडल खेलों में हम तीनों भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और तीनों पदक जीतकर लौटेंगे।’’

    अधिक जानकारी के लिए पैरालंपिक आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

    घरेलू हिंसा पैरा एथलीट राष्ट्रमंडल खेल शर्मिला धनखड़ स्वर्ण पदक
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleकवि और कलम के ओपन माइक में गूंजी कविता और शायरी, नई प्रतिभाओं को मिला मंच
    Next Article देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का दिल का दौरा पड़ने से निधन

    Related Posts

    छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए उतरेगी एसडीआरएफ, असामाजिक तत्वों पर रहेगी नजर

    November 5, 2026

    छौड़ाही प्रखंड प्रमुख मनोज यादव का निर्वाचन रद्द,पद रिक्त

    November 5, 2026

    अतरुआ चौक पर जलजमाव से नाराज ग्रामीणों ने चार घंटे तक किया सड़क जाम, सीओ के आश्वासन पर समाप्त हुआ धरना

    November 5, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए उतरेगी एसडीआरएफ, असामाजिक तत्वों पर रहेगी नजर

    छौड़ाही प्रखंड प्रमुख मनोज यादव का निर्वाचन रद्द,पद रिक्त

    अतरुआ चौक पर जलजमाव से नाराज ग्रामीणों ने चार घंटे तक किया सड़क जाम, सीओ के आश्वासन पर समाप्त हुआ धरना

    पेंशनर समाज के सचिव पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपी गिरफ्तार

    बखरी में गूंजा युवाओं का हुंकार : “लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ”

    विधायक अभिषेक आनंद ने किया स्वास्थ्य उपकेंद्र बरियारपुर पूर्वी का उद्घाटन

    विश्व में एकाकी अध्यात्म देश भारत है, जहां पर परिक्रमा के पग पग पर अश्वमेध यज्ञ — स्वामी चिदात्मन जी।

    संत जूड्स विद्यालय में दीपावली एवं छठ पूजा का भव्य सांस्कृतिक आयोजन

    सामूहिक खरीद-बिक्री से किसानों की बढ़ेगी ताकत, उपज का मिलेगा बेहतर मूल्य

    लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ अभियान के तहत भाजपा जमशेदपुर महानगर की विशाल जनजागरण पदयात्रा, दिग्गज नेत

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.