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    Home » नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और मोदी सरकार के पीछे हटने के प्रमुख मामले
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    नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और मोदी सरकार के पीछे हटने के प्रमुख मामले

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 25, 2026No Comments4 Mins Read
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    नीट प्रश्नपत्र लीक
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    लेखक: भाषा

    नयी दिल्ली, 25 जुलाई (भाषा) नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद को लेकर शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक ऐसा मामला नहीं है, जब 2014 में सत्ता में आने के बाद से नरेन्द्र मोदी सरकार को लगातार बने राजनीतिक या जनता के दबाव के आगे झुकना पड़ा हो।

    नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद और सरकार पर दबाव

    सरकार के पीछे हटने का पहला बड़ा मामला 2015 में सामने आया था, जब बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण को आसान बनाने के उद्देश्य से भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन करने की कोशिश की गई थी।

    इस कदम का किसान संगठनों, विपक्षी दलों और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कई सहयोगी दलों ने व्यापक विरोध किया था। उनका तर्क था कि इन बदलावों से मौजूदा प्रावधान कमजोर हो जाएंगे और यह जनविरोधी कदम है। अंतत: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को घोषणा करनी पड़ी थी कि मौजूदा कानून में कोई बदलाव नहीं किया जायेगा।

    एम. जे. अकबर का इस्तीफा (2018)

    इसके तीन साल बाद, जनता के दबाव के कारण किसी मंत्री के इस्तीफे का पहला बड़ा मामला सामने आया।

    तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम. जे. अकबर ने अक्टूबर 2018 में ‘मी टू’ अभियान के दौरान तब इस्तीफा दे दिया था, जब कुछ महिलाओं ने उन पर संपादक के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। अकबर ने इन आरोपों का खंडन किया था, लेकिन उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

    तीन कृषि कानूनों की वापसी (2021)

    सरकार का फैसला वापस लेने का सबसे बड़ा कदम नवंबर, 2021 में सामने आया था, जब प्रधानमंत्री मोदी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी।

    इन कानूनों के खिलाफ लगभग एक साल तक आंदोलन चला था, जिसमें हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले रहे और इन्हें वापस लेने की मांग करते रहे। हालांकि सरकार लगातार इन सुधारों का बचाव करती रही, लेकिन अंततः उसे झुकना पड़ा। पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार यह फैसला किसान आंदोलन के दबाव में लिया गया।

    यूपीएससी भर्ती विज्ञापन वापसी (2024)

    अगस्त 2024 में, केंद्र सरकार ने नौकरशाही में विशेषज्ञों की सीधी भर्ती के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के एक विज्ञापन को वापस ले लिया था। यह कदम विपक्षी दलों और राजग की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की आपत्तियों के बाद उठाया गया था, क्योंकि इस भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के प्रावधान शामिल नहीं थे।

    संविधान संशोधन विधेयक न लाने का फैसला (2025)

    इसके बाद नवंबर 2025 में सरकार को एक और कदम पीछे हटाना पड़ा था, जब उसने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश नहीं करने का फैसला किया। यह निर्णय खासकर पंजाब के राजनीतिक दलों के कड़े विरोध के बाद लिया गया था, जिनका कहना था कि इस प्रस्ताव से राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी आएगी।

    शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दबाव के आगे सरकार के झुकने का एक और मामला है।

    नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कई दिनों तक चले विरोध-प्रदर्शनों के बाद प्रधान ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया।

    कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी मुख्य मांग बना लिया था। प्रदर्शनकारियों के साथ कई दौर की बातचीत के बाद केंद्र सरकार ने अंततः यह मांग स्वीकार कर ली।

    इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि जनता के दबाव और राजनीतिक विरोध के आगे सरकार को कई बार अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं। नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसी कड़ी की नवीनतम मिसाल है।

    मुख्य बिंदु

    • 2015: भूमि अधिग्रहण कानून संशोधन वापस लिया गया।
    • 2018: एम. जे. अकबर का मी टू आरोपों के बाद इस्तीफा।
    • 2021: तीन कृषि कानूनों की वापसी।
    • 2024: यूपीएससी लैटरल एंट्री विज्ञापन वापस।
    • 2025: संविधान संशोधन विधेयक पेश न करने का फैसला।
    • 2025: नीट प्रश्नपत्र लीक पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
    धर्मेंद्र प्रधान नीट प्रश्नपत्र लीक मोदी सरकार
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