कोलकाता में शुक्रवार को हुए नीट विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पहली बार गुंडा अधिनियम का इस्तेमाल किया है।
गुंडा अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई का निर्देश
कोलकाता, 25 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार ने शुक्रवार को हुए नीट विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोपियों के खिलाफ पहली बार गुंडा अधिनियम का इस्तेमाल किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी जिसे “उनकी आने वाली तीन पीढ़ियां याद रखेंगी।”
शुभेंदु ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा शुक्रवार को कोलकाता में निकाले गए विरोध मार्च के दौरान पत्रकारों और फोटो पत्रकारों पर हुए हमले के संबंध में विधानसभा में बयान देते हुए कहा कि वहां मौजूद करीब 70 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जो “छात्र नहीं हैं” और जिनका नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए कहा कि दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण अधिनियम, 2026 (गुंडा एक्ट) का इस्तेमाल किया गया है।
शुभेंदु ने उपद्रवियों के खिलाफ “सख्त से सख्त कार्रवाई” का आश्वासन देते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ हाल में पारित गुंडा अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं पत्रकार मित्रों पर हुए हमले की पूरी विधानसभा की ओर से निंदा करता हूं।”
शुभेंदु ने कहा कि उपद्रवियों को ‘गुंडा अधिनियम’ के तहत कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी और “इन गुंडों की तीन पीढ़ियां इसे याद रखेंगी।”
उन्होंने कहा, “ऐसी ही गतिविधियों की वजह से गुंडा अधिनियम लाया गया और सदन में विधेयक पारित होने के बाद राज्यपाल ने इसे मंजूरी दी थी।” उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों को अब राज्य में ऐसे कानून की जरूरत समझ में आ गई है।
शनिवार को एक आपराधिक मामले में इस कानून का पहली बार इस्तेमाल किया गया, जिससे उस कानून को तुरंत राजनीतिक महत्व मिल गया, जिसका सरकार ने संगठित अपराधियों से निपटने के लिए ज़रूरी बताकर बचाव किया था।
अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को हुई हिंसा के सिलसिले में सात प्राथमिकी दर्ज की गई हैं — छह हेयर स्ट्रीट पुलिस थाने में और एक एंटाली पुलिस थाने में — तथा इन मामलों में नए कानून की धाराएं भी लगाई गई हैं।
मुख्य तथ्य: एक नजर में
- घटना: नीट विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों पर हमला
- कार्रवाई: पहली बार गुंडा अधिनियम (पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण अधिनियम, 2026) लागू
- पहचान: 70 गैर-छात्र उपद्रवियों की पहचान
- एफआईआर: 7 मामले दर्ज (6 हेयर स्ट्रीट, 1 एंटाली)
- चेतावनी: दोषियों की तीन पीढ़ियां याद रखेंगी सजा
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि और कानूनी ढांचे के बारे में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया पृष्ठ देखें।
इस निर्णायक कार्रवाई से राज्य में संगठित अपराध और राजनीतिक हिंसा पर अंकुश लगाने की दिशा में एक मजबूत संदेश गया है। विपक्षी दलों ने जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है, वहीं सरकार का दावा है कि यह कानून आम नागरिकों और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक था। आने वाले दिनों में इस कानून के क्रियान्वयन और न्यायिक प्रक्रिया पर पूरे देश की नजर रहेगी।

