राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला में नए खुलासे सामने आए हैं। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है।
अयोध्या, 18 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच के तहच अब मंदिर के दैनिक कामकाज में शामिल सभी लोगों से पूछताछ की जाएगी। उच्च पदस्थ सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि मामले की जांच केवल दान के गबन तक सीमित नहीं होगी बल्कि ट्रस्ट द्वारा निर्माण और जमीन की खरीद में किए गए अन्य लेनदेन की भी जांच की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, लगभग 50 लोग मंदिर में भक्तों द्वारा दान किए गए नोटों की गिनती में लगे हुए थे और इनकी भर्ती ट्रस्ट के पदाधिकारियों या उनके साथ जुड़े अन्य लोगों द्वारा की गई सिफारिशों पर की गई थी।
सूत्रों ने बताया कि जांचकर्ता अब इन कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या किसी ने नकदी गिनती ड्यूटी में शामिल होने के बाद अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की है। सूत्रों ने प्रबंधन से जुड़े कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों और कुछ सरकारी पदाधिकारियों को भी जांच के दायरे में लाने की पुष्टि की।
जांचकर्ताओं के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से छह के खिलाफ सीसीटीवी फुटेज से प्रत्यक्ष सबूत मिले हैं।
उन्होंने बताया कि वीडियो में आरोपियों को दान की गिनती करते समय नकदी को अपने कपड़ों, जेबों और जूतों के अंदर छिपाते हुए देखा जा सकता है।
पुलिस ने 25 जून को ट्रस्ट की शिकायत पर मामले में प्राथमिकी दर्ज की और अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया।
मनीष यादव चंपत राय के पूर्व चालक टिन्नू यादव का भतीजा है।
टिन्नू यादव मंदिर के दान बक्सों की कथित तौर पर निगरानी करता था जबकि मनीष प्रसाद की गिनती में शामिल था। पुलिस ने पहले टिन्नू यादव के घर से एक लाख रुपये और मनीष के घर से दो लाख रुपये बरामद किये थे।
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी जून के पहले सप्ताह में सामने आई और अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है।
विपक्षी दलों ने कहा कि वे 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के दौरान राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा उठाएंगे।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: जांच का विस्तार और नए आयाम
जांच एजेंसियों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला को केवल नकदी गबन तक सीमित न रखते हुए, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन की गहन समीक्षा शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, जांच दल निर्माण कार्यों और भूमि अधिग्रहण से जुड़े करोड़ों रुपये के भुगतान की भी पड़ताल कर रहा है।
कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में
लगभग 50 कर्मचारी जो दान की गिनती में लगे थे, उनकी नियुक्ति ट्रस्ट पदाधिकारियों की सिफारिश पर हुई थी। यह भाई-भतीजावाद और पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। जांचकर्ता अब प्रत्येक कर्मचारी की पृष्ठभूमि जांच और आय स्रोतों का मिलान कर रहे हैं।
सीसीटीवी फुटेज से ठोस सबूत
गिरफ्तार आठ आरोपियों में से छह के खिलाफ सीसीटीवी फुटेज में नकदी छिपाते हुए स्पष्ट दृश्य मिले हैं। वीडियो में आरोपी नोटों को कपड़ों, जेबों और जूतों में डालते दिख रहे हैं। यह डिजिटल साक्ष्य अभियोजन पक्ष के लिए मजबूत आधार बनेगा।
मुख्य आरोपियों के पारिवारिक संबंध
- टिन्नू यादव: दान बक्सों की निगरानी का जिम्मा, घर से 1 लाख रुपये बरामद
- मनीष यादव: टिन्नू का भतीजा, प्रसाद गिनती में शामिल, घर से 2 लाख रुपये बरामद
- अन्य छह आरोपी: अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और संसदीय असर
विपक्षी दलों ने 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की घोषणा की है। इससे केंद्र सरकार और ट्रस्ट पर दबाव बढ़ना तय है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आस्था और प्रशासन के बीच संतुलन पर बहस छेड़ सकता है।
ट्रस्ट की आंतरिक सफाई और सुधार
दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए प्रोटोकॉल लागू करने का संकेत दिया है। इसमें दान गिनती की लाइव स्ट्रीमिंग, बाहरी ऑडिट और कर्मचारियों का रोटेशन शामिल हो सकता है।
इस पूरे प्रकरण ने धार्मिक संस्थानों में वित्तीय जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित किया है। भक्तों का विश्वास बनाए रखने के लिए स्वतंत्र निगरानी तंत्र स्थापित करना अनिवार्य हो गया है। आयकर विभाग भी इस मामले में समानांतर जांच कर सकता है।

