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    मार्शल साहब: जिनकी विरासत में आज भी सांस लेता है जमशेदपुर

    News DeskBy News DeskJune 25, 2026No Comments3 Mins Read
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    मार्शल साहब: जिनकी विरासत में आज भी सांस लेता है जमशेदपुर

     

    अमन कुमार शांडिल्य

    कुछ लोग अपने जीवनकाल में सफल होते हैं, और कुछ लोग अपने जाने के बाद भी समाज के भीतर जीवित रहते हैं। स्वर्गीय एस. डी. सिंह ‘मार्शल’ उन्हीं विरल व्यक्तित्वों में से एक थे, जिनकी पहचान केवल एक सफल उद्योगपति, शिक्षाविद् या समाजसेवी की नहीं थी, बल्कि वे जमशेदपुर के सामाजिक विकास की एक जीवंत धारा थे।

     

    आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उन्होंने केवल इमारतें नहीं बनाईं, बल्कि सपनों की नींव रखी। उन्होंने केवल उद्योग स्थापित नहीं किए, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में अवसरों के द्वार खोले। उन्होंने केवल एक विद्यालय की स्थापना नहीं की, बल्कि शिक्षा के माध्यम से पीढ़ियों को भविष्य गढ़ने का मंच दिया।

    मैं स्वयं उन हजारों विद्यार्थियों में से एक हूं, जिन्हें उनके द्वारा स्थापित शिक्षा की उस परंपरा का लाभ मिला। सिदगोड़ा स्थित एसडीएसएम स्कूल फॉर एक्सीलेंस की नींव जिस सोच और उद्देश्य के साथ रखी गई थी, वह केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं था, बल्कि अच्छे नागरिकों का निर्माण करना था। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो महसूस होता है कि उस संस्थान ने केवल किताबों का ज्ञान नहीं दिया, बल्कि जीवन को देखने की दृष्टि भी दी। इसके लिए मार्शल साहब के प्रति मन स्वाभाविक रूप से श्रद्धा और कृतज्ञता से भर उठता है।

    मार्शल साहब उस पीढ़ी के प्रतिनिधि थे, जिसने संघर्ष को सीढ़ी बनाया और सफलता को समाज के साथ साझा किया। छपरा के एक साधारण गांव से निकलकर जमशेदपुर में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने यह साबित किया कि ईमानदारी, मेहनत और दूरदर्शिता के बल पर व्यक्ति न केवल स्वयं आगे बढ़ सकता है, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बन सकता है।

    आज जमशेदपुर के अनेक विकास कार्य, औद्योगिक प्रतिष्ठान और शैक्षणिक संस्थान उनके योगदान की कहानी कहते हैं। लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यह है कि वे लोगों के दिलों में सम्मान के साथ आज भी बसे हुए हैं। किसी व्यक्ति के लिए इससे बड़ी विरासत और क्या हो सकती है कि उसके जाने के दशकों बाद भी लोग उसे केवल याद ही न करें, बल्कि उसे अपना प्रेरणास्रोत मानें।

     

    वर्तमान दौर में जब समाज आदर्श व्यक्तित्वों की तलाश कर रहा है, तब मार्शल साहब का जीवन हमें यह सिखाता है कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल संपत्ति अर्जित करना नहीं, बल्कि समाज के लिए ऐसी स्थायी विरासत छोड़ जाना है, जो पीढ़ियों तक लोगों का मार्गदर्शन करती रहे।

    25 जून केवल उनकी पुण्यतिथि नहीं, बल्कि उस विचार, उस संघर्ष और उस सामाजिक प्रतिबद्धता को नमन करने का दिन है, जिसने जमशेदपुर को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मार्शल साहब आज भले हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच, उनके संस्थान और उनके संस्कार आज भी जीवित हैं। यही किसी महान व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान होती है।
    जमशेदपुर उन्हें हमेशा एक निर्माता, एक शिक्षाविद्, एक समाजसेवी और सबसे बढ़कर एक ऐसे इंसान के रूप में याद रखेगा, जिसने अपने जीवन को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए जिया।
    मार्शल साहब को विनम्र श्रद्धांजलि।

    *”आज उनकी पुण्यतिथि पर विद्यालय में आयोजित रक्तदान शिविर में शामिल होने की इच्छा थी, लेकिन अस्वस्थता के कारण उपस्थित नहीं हो सका। फिर भी मन वहीं था, क्योंकि जिस संस्थान से मैंने शिक्षा प्राप्त की, वह आज भी मार्शल साहब के सेवा, समर्पण और सामाजिक सरोकारों के मूल्यों को जीवंत रखे हुए है।”*

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