लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
दरभंगा में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग और दर्शनशास्त्र विभाग, डॉ प्रभात दास फाउंडेशन के साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण शैक्षिक कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। यह एकल व्याख्यान भारतीय ज्ञान मीमांसा के विविध आयाम पर केंद्रित होगा, जो भारतीय दर्शन और ज्ञान के गहन अध्ययन को बढ़ावा देगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों को एक मंच प्रदान करना है, जहाँ वे भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श कर सकें।
दरभंगा, 22 जून। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग, दर्शनशास्त्र विभाग एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 23 जून 2026 को “भारतीय ज्ञान मीमांसा के विविध आयाम” विषय पर एकल व्याख्यान का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम संस्कृत विभाग के सभागार में हाइब्रिड मोड में सुबह 11:30 बजे से आयोजित होगा।
कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर स्थित जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के सह-प्राध्यापक डॉ विकास सिंह विशिष्ट व्याख्यान देंगे। आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ कृष्णकान्त झा की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई।
बैठक में दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ शिखर वाहिनी, जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ आर.एन. चौरसिया, डॉ ममता स्नेही, डॉ मोना शर्मा, डॉ रवि कुमार राम सहित शोधार्थियों, छात्रों एवं अन्य सदस्यों ने भाग लिया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा पर चर्चा की।
भारतीय ज्ञान मीमांसा के विविध आयाम और इसका महत्व
भारतीय दर्शन में ज्ञान मीमांसा का अर्थ ज्ञान के स्वरूप, स्रोतों, सीमाओं और वैधता का अध्ययन करना है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो सदियों से भारतीय विचारकों के लिए गहन चिंतन का विषय रहा है। इसमें प्रत्यक्ष (प्रत्यक्ष बोध), अनुमान (अनुमान), उपमान (तुलना), शब्द (मौखिक गवाही), अर्थापत्ति (अनुमान), और अनुपलब्धि (गैर-धारणा) जैसे ज्ञान के विभिन्न साधनों पर विचार किया जाता है। यह व्याख्यान इन सभी पहलुओं को उजागर करेगा और प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की गहरी समझ प्रदान करेगा। यह समझना महत्वपूर्ण है कि भारतीय ज्ञान मीमांसा केवल दार्शनिकों के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक वैज्ञानिक और सामाजिक शोध के लिए भी प्रासंगिक है। इसके अध्ययन से न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत की समझ बढ़ती है, बल्कि यह आलोचनात्मक सोच और तार्किक विश्लेषण कौशल को भी विकसित करता है।
भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्विक परिप्रेक्ष्य
आज के वैश्वीकरण के युग में भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। जब दुनिया विभिन्न संस्कृतियों और विचारों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास कर रही है, तब भारतीय ज्ञान मीमांसा जैसे विषय एक पुल का काम कर सकते हैं। यह हमें पश्चिमी दर्शन के साथ संवाद स्थापित करने और ज्ञान के विविध दृष्टिकोणों को समझने का अवसर प्रदान करता है। डॉ. विकास सिंह का व्याख्यान निश्चित रूप से इस वैश्विक संवाद को प्रोत्साहित करेगा और छात्रों को ज्ञान के नए आयामों से परिचित कराएगा।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की शैक्षिक पहल
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) बिहार के दरभंगा में स्थित एक प्रमुख शिक्षण संस्थान है, जो लगातार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इस तरह के आयोजनों के माध्यम से विश्वविद्यालय न केवल अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देता है, बल्कि छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वानों के साथ बातचीत करने का अवसर भी प्रदान करता है। संस्कृत और दर्शनशास्त्र विभागों का यह संयुक्त प्रयास अंतर-विषयक अध्ययन के महत्व को भी दर्शाता है। डॉ प्रभात दास फाउंडेशन के साथ उनका सहयोग ऐसे शैक्षिक कार्यक्रमों को आयोजित करने में सामुदायिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित करता है। यह विश्वविद्यालय का सतत प्रयास है कि वह अपने छात्रों को एक समग्र और समृद्ध शैक्षिक अनुभव प्रदान करे, जिससे वे समाज के लिए मूल्यवान योगदान दे सकें।
डॉ. विकास सिंह: एक प्रमुख शिक्षाविद्
जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के सह-प्राध्यापक डॉ विकास सिंह, भारतीय ज्ञान मीमांसा के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित विद्वान हैं। उनकी विशेषज्ञता और शोध ने इस विषय में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान की है। उनका व्याख्यान छात्रों और शोधार्थियों को इस जटिल विषय को समझने में मदद करेगा और उन्हें नए शोध के रास्ते तलाशने के लिए प्रेरित करेगा। ऐसे विद्वानों की उपस्थिति से शैक्षिक वातावरण समृद्ध होता है और ज्ञान की खोज को नई दिशा मिलती है।
हाइब्रिड मोड की सुविधा
कार्यक्रम का हाइब्रिड मोड में आयोजन एक आधुनिक और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह सुविधा उन छात्रों और शोधार्थियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जो भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हो सकते हैं, लेकिन फिर भी व्याख्यान से लाभ उठाना चाहते हैं। प्रौद्योगिकी का यह उपयोग शैक्षिक पहुंच को बढ़ाता है और ज्ञान के प्रसार को भौगोलिक सीमाओं से परे ले जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि अधिकतम लोग इस महत्वपूर्ण चर्चा का हिस्सा बन सकें।
भविष्य के शैक्षिक कार्यक्रम और [INTERNAL_LINK_HOLDER]
यह एकल व्याख्यान ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित होने वाले कई शैक्षिक कार्यक्रमों में से एक है। विश्वविद्यालय और डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन भविष्य में भी ऐसे ही ज्ञानवर्धक आयोजनों की योजना बना रहे हैं, जो छात्रों और संकाय सदस्यों को विभिन्न विषयों में नवीनतम शोध और विचारों से अवगत करा सकें। ऐसे कार्यक्रम [INTERNAL_LINK_HOLDER] न केवल विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को बढ़ाते हैं, बल्कि क्षेत्र में अकादमिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देते हैं। भारतीय ज्ञान मीमांसा पर यह विशेष व्याख्यान एक मील का पत्थर साबित होगा, जो छात्रों को अपनी जड़ों से जुड़ने और वैश्विक ज्ञान परंपराओं को समझने में मदद करेगा। भारतीय दर्शन और ज्ञान मीमांसा पर अधिक जानकारी के लिए, आप भारतीय दर्शन पर विकिपीडिया पृष्ठ देख सकते हैं।

