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    Home » सुख़न का आशियाँ: बशीर बद्र के नाम साहित्यिक संगोष्ठी
    खबरें राज्य से साहित्य

    सुख़न का आशियाँ: बशीर बद्र के नाम साहित्यिक संगोष्ठी

    Nikunj GuptaBy Nikunj GuptaJune 16, 2026No Comments5 Mins Read
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    सुख़न का आशियाँ
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और कांकेर से साहित्यिक गतिविधियों की एक सुखद खबर सामने आई है। साहित्यिक मंच ‘सुख़न का आशियाँ’ ने हाल ही में एक गरिमामयी ऑनलाइन साहित्यिक संगोष्ठी का सफल आयोजन किया, जिसका शीर्षक था ‘एक शाम बशीर बद्र के नाम’। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य महान शायर बशीर बद्र साहब के साहित्यिक योगदान को सम्मान देना और देशभर के नवोदित एवं स्थापित साहित्यकारों को एक मंच प्रदान करना था। यह संगोष्ठी साहित्यिक प्रेमियों और रचनाकारों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित हुई, जिसमें कविता, ग़ज़ल और मुक्तक की उत्कृष्ट प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिसने साहित्य जगत में नई ऊर्जा का संचार किया।

    साहित्यिक मंच ‘सुख़न का आशियाँ’ द्वारा ऑनलाइन साहित्यिक संगोष्ठी ‘एक शाम बशीर बद्र के नाम’ का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कवयित्री एवं लेखिका ममता साहू ने की, जबकि संयोजन केविन चौहान द्वारा किया गया। कार्यक्रम में नरेंद्र सिंह एवं सुरभि शुक्ला विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संगोष्ठी का शुभारंभ डॉ. कुसुम रानी सिंघल ने सरस्वती वंदना से किया।

    ‘सुख़न का आशियाँ’ की गरिमामयी संगोष्ठी: ‘एक शाम बशीर बद्र के नाम’

    इस विशेष आयोजन ने साहित्य प्रेमियों को एक साथ जोड़ा, भले ही वे भौगोलिक रूप से दूर क्यों न हों। ऑनलाइन माध्यम ने यह संभव बनाया कि देश के कोने-कोने से साहित्यकार और श्रोता इस साहित्यिक उत्सव का हिस्सा बन सकें। ‘सुख़न का आशियाँ’ का यह प्रयास वास्तव में सराहनीय है, क्योंकि यह न केवल स्थापित नामों को बल्कि उभरती प्रतिभाओं को भी अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर देता है। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. कुसुम रानी सिंघल की मधुर सरस्वती वंदना से हुई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय और साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया। अध्यक्षता कर रहीं कवयित्री ममता साहू ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को और भी गरिमामयी बना दिया, वहीं केविन चौहान का कुशल संयोजन कार्यक्रम को सुचारु रूप से चलाने में महत्वपूर्ण रहा। विशिष्ट अतिथियों नरेंद्र सिंह और सुरभि शुक्ला की उपस्थिति ने भी आयोजन की शोभा बढ़ाई।

    बशीर बद्र के जीवन और साहित्य पर प्रकाश

    कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रख्यात भारतीय शायर बशीर बद्र साहब के जीवन एवं साहित्यिक अवदान पर केविन चौहान ने प्रकाश डाला। तत्पश्चात देशभर से जुड़े साहित्यकारों ने अपनी स्वरचित रचनाओं का पाठ कर साहित्यिक वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। नागपुर की बाल कवयित्री मिहूँ अग्रवाल विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। वहीं, कांकेर के बाल कवि सौम्य साहू की ‘गौ माता’ पर रचित कविता ने वातावरण को जीवंत कर दिया।

    बशीर बद्र (जन्म: 15 फरवरी 1935) हिंदी और उर्दू शायरी के एक ऐसे स्तंभ हैं, जिनकी ग़ज़लें दिलों को छू लेती हैं। उनके योगदान को याद करना और उनकी विरासत को आगे बढ़ाना इस संगोष्ठी का एक महत्वपूर्ण पहलू था। बशीर बद्र के बारे में अधिक जानने के लिए, आप विकिपीडिया पर जा सकते हैं। इस आयोजन में कविता पाठ ने साहित्यिक गलियारों में एक नई ऊर्जा का संचार किया। युवा प्रतिभाओं, विशेषकर बाल कवयित्री मिहूँ अग्रवाल और बाल कवि सौम्य साहू की प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया, यह दर्शाता है कि साहित्य की लौ नई पीढ़ी में भी प्रज्वलित है और उन्हें उचित मंच मिलने पर वे उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।

    साहित्यकारों का महाकुंभ: ‘सुख़न का आशियाँ’ मंच पर

    संगोष्ठी में आ. सोनिया नायडू, डॉ. संजीदा खानम शाहीन, मनोरमा शर्मा “मनु”, साधना शाही, मेघा अग्रवाल, डॉ. कृष्ण कुमार चन्द्रा, रमेश चन्द्रा, सुनील कुमार खुराना, कंचन योगेंद्र अग्रवाल, तमन्ना परवीन, मोहम्मद रहीस सनम, सावित्री नेताम, हेमिन नेताम, नन्दकिशोर बहुखण्डी, मनमोहन साहू, इशु कुमार सिंह “उपदेश”, डॉ. मीना कुमारी परिहार “मान्या”, साधना छिरोल्या एवं भानुप्रिया देवी आदि ने सहभागिता निभाई और कविता, गीत, ग़ज़ल तथा मुक्तक की उत्कृष्ट प्रस्तुतियाँ दीं।

    इस आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 20 से अधिक साहित्यकारों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। यह विविधता साहित्यिक मंच ‘सुख़न का आशियाँ’ की विशेषता को दर्शाती है, जो विभिन्न शैलियों और विचारों को एक साथ लाने का काम करता है। प्रस्तुत की गई रचनाओं में मानवीय भावनाओं के कई रंग देखने को मिले – प्रेम, विरह, सामाजिक सरोकार और प्रकृति का चित्रण। प्रत्येक रचनाकार ने अपनी अनूठी शैली और भावुकता से श्रोताओं को प्रभावित किया, जिससे ऑनलाइन माध्यम भी जीवंत हो उठा। यह साहित्य का एक ऐसा महाकुंभ था, जहां हर आवाज़ को सम्मान मिला और हर रचना ने अपनी छाप छोड़ी। इसमें अनुभवी कवियों के साथ-साथ नए चेहरों को भी समान रूप से प्रोत्साहित किया गया।

    ममता साहू का अध्यक्षीय उद्बोधन और आभार

    कार्यक्रम के समापन अवसर पर अध्यक्ष ममता साहू ने सभी अतिथियों, रचनाकारों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए साहित्यिक गतिविधियों में निरंतर सहभागिता बनाए रखने का आह्वान किया।

    ममता साहू ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में साहित्यिक संगोष्ठियों के महत्व पर ज़ोर दिया और ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का हृदय से आभार व्यक्त किया और विशेष रूप से युवा कवियों को प्रोत्साहित किया। उनका संदेश था कि साहित्य समाज का दर्पण है और इसे सजीव बनाए रखने के लिए सभी का योगदान आवश्यक है। उनके प्रेरणादायी शब्दों ने सभी को भविष्य में और अधिक उत्साह से साहित्यिक कार्यों में संलग्न होने के लिए प्रेरित किया।

    कुल मिलाकर, ‘एक शाम बशीर बद्र के नाम’ साहित्यिक संगोष्ठी ‘सुख़न का आशियाँ’ के लिए एक और सफल अध्याय थी। इसने न केवल बशीर बद्र जैसे महान शायर को श्रद्धांजलि दी, बल्कि देशभर के साहित्यकारों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का एक सशक्त मंच भी प्रदान किया। इस आयोजन ने साहित्यिक बंधुत्व को मजबूत किया और कला प्रेमियों को एक यादगार शाम दी। आशा है कि ‘सुख़न का आशियाँ’ भविष्य में भी ऐसे ही प्रेरणादायक और सारगर्भित साहित्यिक आयोजनों का सिलसिला जारी रखेगा, जिससे साहित्य का क्षेत्र और समृद्ध होगा।

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