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    Home » जमीन गई, नौकरी नहीं मिली, यूसील के खिलाफ खेत में उतरीं विस्थापित महिला आशा उरांव, अनोखे विरोध से मचा हड़कंप
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    जमीन गई, नौकरी नहीं मिली, यूसील के खिलाफ खेत में उतरीं विस्थापित महिला आशा उरांव, अनोखे विरोध से मचा हड़कंप

    Aman OjhaBy Aman OjhaJune 6, 2026No Comments3 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता

     

    यूसील जादूगोड़ा में जमीन के बदले नौकरी न मिलने से नाराज विस्थापित महिला आशा उराव ने अनोखा विरोध शुरू कर दिया है। शुक्रवार को आशा अपने परिवार के साथ अस्पताल चौक के पास पहुंचीं और जिस जमीन पर अपना हक जता रही हैं, वहां खेती की तैयारी शुरू कर दी।

     

    पहले गेट पर जड़ा था ताला

    आशा उराव लंबे समय से यूसील प्रबंधन से नौकरी की मांग कर रही हैं। मांग अनसुनी होने पर वह पहले एचपी यूनिट के मुख्य द्वार पर ताला जड़ चुकी हैं। अस्पताल चौक के पास मुख्य द्वार के निर्माण का काम भी रुकवा चुकी हैं।

     

    इस बार खेत में उतरीं 

    इस बार विरोध का तरीका बदला। बिना हंगामे के सीधे अस्पताल चौक के पास पहुंचीं और परिजनों के साथ जमीन की साफ-सफाई कर खेती की तैयारी में जुट गईं। सूचना मिलते ही यूसील प्रबंधन में हड़कंप मच गया। कंपनी ने तुरंत निजी सुरक्षा कर्मियों को मौके पर भेजा।

     

    बातचीत के बाद मामला नहीं सुलझा

    सुरक्षा कर्मियों के समझाने पर भी आशा नहीं मानीं। वह कंपनी में नौकरी की मांग पर अड़ी रहीं और साफ-सफाई का काम जारी रखा। विवाद बढ़ता देख प्रबंधन ने आशा उराव को बातचीत के लिए कंपनी परिसर बुलाया। काफी देर समझाइश के बाद मामला शांत हुआ।

     

    आशा उराव बोलीं: ना जमीन बची, ना रोजगार मिला  

    आशा उराव ने कहा, “कंपनी खुलते समय स्थायी रोजगार देने का वादा किया गया था। आज तक जमीन के बदले नौकरी नहीं मिली। परिवार बेरोजगार है। जमीन रहती तो खेती कर पेट पालते। अब न जमीन है, न नौकरी। इसलिए अस्पताल चौक के पास अपनी खाली जमीन पर खेती का फैसला लिया है।”

    हक मांगो तो थाने में शिकायत

    आशा का आरोप है कि जब-जब उन्होंने हक के लिए आवाज उठाई, प्रबंधन ने जादूगोड़ा थाने में झूठी शिकायत दर्ज करा दी। “मैं इसकी भुक्तभोगी हूं। रोजगार तो मिला नहीं, उल्टा थाने के चक्कर लगाने पड़े,” आशा ने कहा।

    वही यूसिल के सुरक्षा कर्मियों का कहना है कि प्रशासन के लोग भी अब यूसिल का साथ देना छोड़ दिए हैं।

    विस्थापित महिला आशा उरांव के द्वारा यूसिल अस्पताल में भी एक-रे रूम का काम को लगभग 10 सालों से बंद कर दिया गया है यह रूम भी खंडहर होता जा रहा है।

    कई बार प्रशासन को बुलाने के बावजूद भी प्रशासन के लोग नहीं पहुंचे।

    वहीं प्रशासन का कहना है कि यूसिल प्रबंधन के बार-बार लिखित आश्वासन देने के बाद भी वादा खिलाफी की जाती है

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