राष्ट्र संवाद संवाददाता संजय सिन्हा
नगरपालिका में महिला सशक्तिकरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विडंबना यह है कि कुछ महिला पार्षदों के पति ही उन्हें वास्तविक अधिकारों का उपयोग नहीं करने दे रहे हैं।
सरकार द्वारा महिला जनप्रतिनिधियों को अपने संवैधानिक दायित्व निभाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, लेकिन आरोप है कि कुछ पार्षदों के पति स्वयं सत्ता का उपयोग कर खुद को ही पार्षद के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
जोड़ा नगरपालिका में यह परंपरा लंबे समय से चलते आ रहा है। हलाकि राज्य मे सरकार चेंज होने पर ओडिशा सरकार सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए अभियान चला रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और है,जो जोड़ा मे देखने को मिल रहा है।
अब आम जनता के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है कि परिषद बैठकों में पार्षद पतियों की मौजूदगी और हस्तक्षेप क्या वैध प्रतिनिधित्व है या फिर नियमों का खुला उलंघन।

