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    Home » जंगली हाथियों के कॉरिडोर में अवैध खनन ही बना बड़ा संकट, क्या जंगली हाथियों को बांधा जा सकता है !
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    जंगली हाथियों के कॉरिडोर में अवैध खनन ही बना बड़ा संकट, क्या जंगली हाथियों को बांधा जा सकता है !

    Aman OjhaBy Aman OjhaMay 17, 2026No Comments3 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता संजय शर्मा 

     

    जल जंगल जमीन हमारा , तो जंगल का हाथी किसका ? ईचागढ विधान सभा क्षेत्र में जंगली हाथियों का बढ़ता उत्पात अब गंभीर चिंता का विषय बन गया है। बीते कई वर्षों से हाथियों के गांवों में घुसने, फसल रौंदने और जानमाल के नुकसान की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हालांकि अब स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता इसके पीछे जंगल क्षेत्र में हो रहे अवैध बालू और पत्थर खनन को बड़ी वजह बता रहे हैं। अब स्थानीय बाहरी के सफेदपोश नेतागण बताए ,श्वेत पत्र जारी करे कि जल जंगल जमीन हमारा तो जंगली हाथी किसका, ये सवाल जो चर्चा में है !

    *जंगली हाथियों के कोरिडोर पर अवैध कारोबारियों का कब्जा*

    दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी से लेकर आसनबनी, रामगढ़, कादरबेड़ा ,ईचगढ़ कुकड़ू स्थित सुवर्णरेखा नदी से सटे इलाकों तक हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर में बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार चलने का आरोप उठ रहे है। पुलिस प्रशासन बताए कि कैसे क्षेत्र में दर्जनों अवैध बालू घाट, पत्थर खदान, आयरन और चारकोल टाल संचालित हो रहे हैं। भारी वाहनों और मशीनों के शोर से जंगल का वातावरण प्रभावित हो रहा है।

    ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के प्राकृतिक रास्ते और सुवर्णरेखा नदी क्षेत्र में अवैध बालू खनन से जल स्रोत प्रभावित होने के कारण हाथियों का झुंड भोजन और पानी की तलाश में गांवों की ओर आ रहे है। ईचागढ़, कुकड़ू सुवर्णरेखा नदी बालू घाटों से जंगली सुनसान जगल रस्ते में दिन ओर रात के समय ट्रैक्टर, हाईवा, जेसीबी और लोडर मशीनों की आवाजाही से हाथियों का जंगल में रहना मुश्किल हो गया है। भटक कर मानव बस्ती इलाके में प्रवेश कर रहे है.

    “ *हाथियों को बांधकर नहीं रखा जा सकता”**

    वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार हाथी बेहद संवेदनशील वन्य प्राणी हैं और वे अपने पारंपरिक रास्तों से ही आवागमन करते हैं। ऐसे में उनके कॉरिडोर में अवरोध और लगातार शोर-प्रदूषण उनके व्यवहार को प्रभावित करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जंगली हाथियों को बांधकर नहीं रखा जा सकता, बल्कि उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना ही सबसे बड़ा उपाय है। जंगली हाथी संवेदनशील प्राणी है, बेजुबान शिकायत कैसे करे ,इस कारण प्रतिक्रिया स्वरूप उत्पात मचाता है

    *हर घटना के बाद वन विभाग पर उठते हैं ,सवाल रटा रटाया*

    हाथियों के हमले में कई गरीब परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कई लोगों की जान गई, जबकि अनेक घर और फसलें बर्बाद हुईं। हर घटना के बाद राजनीतिक नेताओं की बयानबाजी शुरू हो जाती है और वन विभाग पर सवाल उठते हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल मुआवजा देकर समस्या का समाधान संभव नहीं है।

    लोगों का कहना है कि आखिर यह जांच क्यों नहीं होती कि हाथी जंगल छोड़कर गांवों की ओर क्यों आ रहे हैं। यदि हाथियों के कॉरिडोर पर अतिक्रमण कर अवैध खनन ओर परिवहन जारी रहेगा तो मानव और हाथी संघर्ष की घटनाएं और बढ़ेंगी।

    *अवैध बालू कारोबारियों को मिलता संरक्षण जिम्मेदार*

    अवैध कारोबार पर कार्रवाई सांकेतिक होना सबसे बड़ा कारण ,है पुलिस प्रशासन के रवैये से अवैध कारोबारियों के हौसले बढ़े हुए है.पूरे प्रकरण में अवैध बालू खनन कारोबारियों पर सहानुभूति पूर्वक करवाई सवालों के घेरे में है,

    स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सुवर्णरेखा नदी बालू घाटों खनन एवं जंगल क्षेत्र से चल रहे अवैध बालू परिवहन भंडारण पर कार्रवाई की जाए।

    वनपाल वि. एन .महतो ने कहा जंगली हाथियों का आबादी क्षेत्र में भटकने के कारण जानमाल की हो रहे नुकशान की वजह जंगल क्षेत्र में सुवर्ण रेखा नदी बालू घाटों से अवैध खनन भंडारण ओर रात्रि में विशेषकर भारी मशीनों के शोर से भटक रहे है .सही जांच होनी चाहिए .

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