उत्तर प्रदेश के ग्रामीण समाज शहरपुर में मातृ दिवस का विशेष आयोजन: मुख्य अतिथि के रूप में असम की साहित्यकार मनीषा शर्मा ने की शिरकत
राष्ट्र संवाद संवाददाता
रितेश शर्मा
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में शैक्षिक एवं आर्थिक विकास के क्षेत्र में एक मौन क्रांति का सूत्रपात करने वाली अग्रणी स्वयंसेवी संस्था ‘शिबानी इकोनॉमिक एजुकेशन डेवलपमेंट फाउंडेशन’ (SEED Foundation) के तत्वावधान में हाल ही में मातृ दिवस अत्यंत गरिमामय वातावरण में मनाया गया। ग्रामीण समाज की माताओं के त्याग को मान्यता देने और उन्हें जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में असम की प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं पत्रकार मनीषा शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
मुख्य अतिथि के संबोधन के दौरान मनीषा शर्मा ने मातृ दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की व्याख्या करते हुए कहा कि आधुनिक मातृ दिवस की अवधारणा सबसे पहले संयुक्त राज्य अमेरिका की एना जार्विस नामक महिला के प्रयासों से शुरू हुई थी। माँ की महिमा का गुणगान करते हुए उन्होंने कहा, “प्रत्येक संतान की सफलता के पीछे माँ के असीम त्याग और आशीर्वाद का हाथ छिपा होता है। वर्तमान के यांत्रिक युग में समाज में माताओं के प्रति जो उपेक्षा देखी जा रही है, उसे दूर करने के लिए नई पीढ़ी को सही शिक्षा के माध्यम से समझाना होगा।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सामाजिक जीवन के संस्कार और अपनी संस्कृति के रीति-रिवाजों की शिक्षा बच्चों को घर से ही दी जानी चाहिए और इस पुनीत कार्य में एक माँ की जिम्मेदारी निर्विवाद है।
कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित एनटीपीसी (NTPC) के महाप्रबंधक बी.के. श्रीवास्तव ने कहा कि आज के बच्चों को वास्तविक रूप से शिक्षित करने के लिए माताओं का सजग और जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है। घर से ही एक स्वस्थ वातावरण और परिवेश प्रदान करने पर ही आज का बच्चा कल देश का योग्य भविष्य बनकर उभरेगा। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित शारदा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शिवराम खारा ने माँ की बहुआयामी भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा, “माँ केवल एक व्यक्ति नहीं है; माँ एक प्राथमिक चिकित्सक, एक शिक्षक और एक शाश्वत मित्र है। प्रत्येक बच्चे के चहुंमुखी विकास के लिए माँ को निरंतर संघर्ष करना पड़ता है।” उन्होंने यह भी कहा कि हर माँ अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक पालन कर रही है।
इस कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि के रूप में प्रोफेसर सर्वेश चंद्र, मिस दीपा चंद्र, डॉ. राजश्री अधिकारी, शिक्षिका खिला जोशी, मिस टीना सहाना और मिस अलका कलशिकार ने भी अपने विचार साझा किए। सभी वक्ताओं ने समाज के प्रत्येक स्तर पर माँ के प्रभाव और शिक्षा के प्रसार पर महत्वपूर्ण विचार रखे।
कार्यक्रम का एक अत्यंत भावुक और सराहनीय पक्ष तब देखने को मिला जब ‘शिबानी इकोनॉमिक एजुकेशन डेवलपमेंट फाउंडेशन’ की संस्थापिका श्रीमती बर्नाली खारा की अनूठी पहल पर स्थानीय पुत्रों ने अपनी-अपनी माताओं को गुलाब के फूलों का गुच्छा भेंट कर उनका सम्मान किया। इसके अतिरिक्त, संस्था द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों के साथ-साथ क्षेत्र के फुटपाथ पर रहने वाली निर्धन माताओं और बच्चों के लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई। संस्था के इस मानवीय कार्य की स्थानीय जनता और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के जिन क्षेत्रों में बच्चे आज भी शिक्षा से वंचित हैं, वहाँ शिक्षा की ज्योति जलाकर बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाने और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में श्रीमती बर्नाली खारा और प्रोफेसर शिवराम खारा के व्यक्तिगत प्रयासों ने एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
कार्यक्रम के अंत में सभी विशिष्ट अतिथियों ने समाज के प्रत्येक जागरूक और सक्षम व्यक्ति से इन निराश्रित और वंचित लोगों की सहायता के लिए हाथ बढ़ाने का आह्वान किया। इस आशावाद के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ कि समाज का छोटा सा सहयोग भी किसी उपेक्षित बच्चे का संपूर्ण भविष्य बदल सकता है।

