राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। क़ौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता एवं शिक्षाविद् कुलबिंदर सिंह ने सिखों की धार्मिक राजनीति करनेवालों को चेताया है कि पूर्वजों द्वारा अर्जित परिसंपत्ति को बचाने की बजाए राजनीति की जा रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
कुलबिंदर सिंह ने जिला शिक्षा विभाग के गत 22 अप्रैल के महत्वपूर्ण फैसला का जिक्र करते हुए कहा कि विभाग ने टूइला डूंगरी स्थित स्कूल कलगीधर मध्य विद्यालय की प्रबंध कारिणी समिति को भंग कर दिया। जबकि इसका कार्यकाल अभी बाकी था। पिछली बार भी टूइलाडूंगरी गुरुद्वारा कमेटी के पदाधिकारी की आपसी खींचतान के कारण शिक्षा प्रसार पदाधिकारी को आम सभा आयोजित कर कमेटी का गठन करना पड़ा था। प्रताप सिंह अध्यक्ष एवं रविंद्र सिंह सचिव चुने गए थे।
गुरुद्वारा कमेटी का प्रधान बनते ही सतबीर सिंह को लगा कि विद्यालय का नियंत्रण कमेटी के हाथ में होना चाहिए। पूर्व प्रधान जो नहीं कर सके थे वह करने में लग गए। वहां जमीन के एक टुकड़े को लेकर सीजीपीसी फंसी हुई है, इसे लेकर विभाग की जांच भी चल रही है। इन सामाजिक नेताओं को पूरी समझ है कि गुरु नानक स्कूल साकची, गुरु नानक स्कूल मानगो, सरदार माधो सिंह स्कूल बिस्टुपुर की भांति कलगीधर मध्य विद्यालय अल्पसंख्यक अनुदानित विद्यालय नहीं बल्कि एक अनुदानित विद्यालय है।
7 जनवरी 2024 को आमसभा में निर्वाचित अध्यक्ष प्रताप सिंह और सचिव रविंद्र सिंह के विरोध में इतना आगे बढ़े कि विभाग को हस्तक्षेप करने का मौका मिल गया और पुरानी कमेटी को भंग कर दिया। और तदर्थ कमेटी का गठन कर दिया। लेकिन इसमें गुरुद्वारा कमेटी को कोई जगह नहीं दी गई है। इसके बावजूद गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान और सीजीपीसी पदधारी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं कि प्रताप सिंह और रविंद्र सिंह को बाहर कर दिया है। उनके इशारों पर नहीं चलने वाले प्रधानाध्यापक लंबोदर आचार्य की बजाए अब नया प्रभारी पिंटू कुमार सिंह है। जो उसकी सुनेगा और उसके इशारों पर चलेगा। यह पदधारी क्या यह नहीं जानते कि प्रधानाध्यापक प्रबंध कमेटी के अधीन है और इस समय कमेटी पर पूरा नियंत्रण विभाग का हो गया है। जितना जोर पदधारियों और तथाकथित समाजिक नेताओं ने रविंद्र सिंह और प्रताप सिंह को हटाने में लगाया है। उसकी बजाए संस्थान को अल्पसंख्यक घोषित करवाने में लगाएं तो पूर्वजों की परिसंपत्ति बची रहेगी।
पूर्व में कमेटी की आपसी खींचतान के कारण ही सिखों के हाथ से माधो सिंह हाई स्कूल, बंगालियों के हाथ से पीपुल्स अकादमी और मारवाड़ियों के हाथ से राजस्थान हाई स्कूल निकल गया। भवन और करोड़ों रुपए की जमीन आज सरकार के अधीन है।

