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    Home » IPS किशोर कुणाल: जब SSP ने CM से कहा- मामले से दूर रहें | राष्ट्र संवाद
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    IPS किशोर कुणाल: जब SSP ने CM से कहा- मामले से दूर रहें | राष्ट्र संवाद

    Devanand SinghBy Devanand SinghApril 9, 2026No Comments2 Mins Read
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    IPS किशोर कुणाल
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    IPS किशोर कुणाल: जब पटना SSP ने मुख्यमंत्री को कहा “इस मामले से दूर रहिए”

    राष्ट्र संवाद डेस्क
    पटना। बिहार पुलिस के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो अपनी सख्त छवि, निष्पक्ष कार्रवाई और साहसिक फैसलों के लिए आज भी याद किए जाते हैं। ऐसे ही चर्चित सुपर कॉप रहे IPS अधिकारी किशोर कुणाल, जिनकी कार्यशैली ने सत्ता के शीर्ष तक को असहज कर दिया था।
    1983 में पटना में चर्चित “बॉबी हत्याकांड” ने पूरे बिहार को हिला दिया था। श्वेतानिशा त्रिवेदी उर्फ बॉबी, जो विधान परिषद से जुड़ी थीं, की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। हैरानी की बात यह रही कि महज चार घंटे के भीतर उनके शव को दफना दिया गया। मामला जब सुर्खियों में आया तो तत्कालीन पटना SSP किशोर कुणाल ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
    कुणाल ने अदालत से अनुमति लेकर कब्र खुदवाकर शव को बाहर निकलवाया और पोस्टमार्टम कराया। रिपोर्ट में मौत की वजह मैलाथियान नामक जहरीले कीटनाशक को बताया गया, जिससे मामला और पेचीदा हो गया। जांच की आंच नेताओं तक पहुंचने लगी, जिससे राजनीतिक दबाव भी बढ़ा। अंततः केस को CBI को सौंप दिया गया, जहां इसे आत्महत्या करार देते हुए आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई।
    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एक किस्सा बेहद चर्चित रहा, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा ने फोन पर कुणाल से मामले की जानकारी लेनी चाही। जवाब में कुणाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा—“सर, आप इस मामले में मत पड़िए, इसमें इतनी तेज आग है कि आपके हाथ जल जाएंगे।” यह बयान उनकी निडरता और निष्पक्षता का प्रतीक माना जाता है।
    किशोर कुणाल सिर्फ एक सख्त पुलिस अधिकारी ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक के रूप में भी जाने जाते हैं। कहा जाता है कि एक बार ट्रेन यात्रा के दौरान उन्होंने कुछ यात्रियों को एक मंदिर की बदहाली पर चर्चा करते सुना। उसी क्षण उन्होंने संकल्प लिया और 30 अक्टूबर 1983 से मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कराया, जो आगे चलकर एक मिसाल बन गया।
    आज के दौर में जब पुलिस पर राजनीतिक दबाव के आरोप अक्सर लगते हैं, तब किशोर कुणाल जैसे अधिकारियों की कार्यशैली एक प्रेरणा के रूप में सामने आती है। उनकी कहानी बताती है कि ईमानदारी और साहस के साथ काम किया जाए तो व्यवस्था में बदलाव संभव है।

    साभार:संतोष कुमार पांडे के एफबी वाल से

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