राष्ट्र संवाद संवाददाता
गम्हरिया के ऊपरबेड़ा स्थित बैंक द्वारा सील की गई एसएस सेरेमिक्स एंड केमिकल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का शटर काटकर कई सामान गायब कर दिए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस बावत कंपनी के पूर्व मालिक रोहित गोयल ने बताया की उन्होंने बैंक ऑफ़ बड़ोदा समेत अन्य बैंक से अपने इस राइस मिल को चलाने के लिए कर्ज लिया था। किंतु, कंपनी में उपलब्ध पानी के काफी आयरनयुक्त और विशाक्त होने के कारण उत्पादित चावल की गुणवत्ता खराब हो रही थी। इससे आम लोगों का स्वास्थ्य खराब हो सकता था। इस वजह से वे अपनी कंपनी नहीं चला सके। इस कारण उनपर कर्ज का बोझ बढ़ता चला गया। अंततः बैंक ऑफ़ बड़ोदा द्वारा कंपनी को अपने कब्जे में लेकर उसे सील कर दिया गया था। इसके खिलाफ रांची के डीआरटी कोर्ट में मामला दर्ज कराया गया था जो अभी लंबित है। उन्होंने बताया कि इसी बीच बैंक के अधिकारियों द्वारा कर्ज की वसूली के लिए औक्शन भी किया गया और किसी अन्य धारक को फैक्ट्री दे दी गई। लेकिन, न्यायालय के आदेश के अनुसार जब तक मामला लंबित है तब तक किसी का भी इस कंपनी पर अधिकार नहीं हो सकता था। इसलिए कंपनी को सील कर दिया गया था। इस बीच उन्हें सूचना मिली कि उनकी कंपनी से लगातार चोरियां हो रही है। उक्त सूचना पर रविवार को जब वे मौके पर पहुंचे तो उन्होंने मुख्य गेट पर लगा हुआ सील और ताला नहीं पाया। इस बावत जब वहां तैनात सुरक्षा गार्ड से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया की बैंक मैनेजर के द्वारा ही सील को खोला गया है। इसके बाद जब उन्होंने अंदर जाकर देखा तो पाया कि भीतर के शटर में सील बाकायदा लगा है, लेकिन दूसरी ओर शटर को काटकर भीतर रखे सारे महंगे यंत्र और सामान गायब है। इसके अलावा कंपनी के कार्यालय से भी महंगे मोटर और एयर कंडीशन भी गायब पाए गए। इसके बाद उन्होंने जमकर हंगामा किया। उन्होंने बताया कि बैंक द्वारा किए गए ऑक्शन के बाद इस कंपनी को पीआरबी एसोसिएट्स को दिया गया था जिसके संचालक महेंद्र मिश्रा, अखिलेश मिश्रा और आशीष मिश्रा हैं। उन्होंने बैंक ऑफ़ बड़ौदा के प्रबंधक की मिली भगत से कंपनी में चोरी होने की आशंका व्यक्त किया है। उन्होंने तत्काल कंपनी में रखे अन्य सामानों की सुरक्षा के मद्देनजर रविवार को अपना निजी ताला कंपनी गेट में जड़ दिया है ताकि उसकी चोरी नहीं हो सके। गोयल ने बताया कि फैसला आने तक किसी भी व्यक्ति का प्रवेश निषेध कर दिया गया है। उन्होंने कहा है कि इसे लेकर अब वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

