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    Home » यूसीआईएल में उत्पादन ठहराव पर घिरा प्रबंधन,नीतियों की अस्पष्टता और बढ़ती अशांति ने बढ़ाई चिंता
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    यूसीआईएल में उत्पादन ठहराव पर घिरा प्रबंधन,नीतियों की अस्पष्टता और बढ़ती अशांति ने बढ़ाई चिंता

    Aman OjhaBy Aman OjhaApril 2, 2026No Comments3 Mins Read
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    यूसीएल को हड़ताल रोकना नया सी एम डी के लिए चुनौती

     

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

     

    देश के रणनीतिक महत्व वाले उपक्रम यूसिआईएल में इन दिनों हालात सामान्य नहीं दिख रहे हैं। उत्पादन की रफ्तार जहां सुस्त पड़ती नजर आ रही है, वहीं अंदरूनी माहौल में बढ़ती असंतोष की आवाजें भी तेज हो गई हैं।नए सीएमडी डॉ. कंचन आनंद राव के कार्यभार संभालने के कुछ महीने बीत जाने के बाद भी उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार नहीं दिखने से प्रबंधन की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।

    लक्ष्य से पीछे उत्पादन, बढ़ा दबाव

    सूत्र बताते हैं कि चालू वित्तीय वर्ष में उत्पादन लक्ष्य के मुकाबले प्रगति संतोषजनक नहीं है। लगातार व्यवधान और कार्यस्थल पर अस्थिर माहौल का असर उत्पादन चक्र पर साफ दिख रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्पादन में गिरावट केवल तकनीकी नहीं, बल्कि प्रबंधन और मानव संसाधन के तालमेल की कमी का परिणाम भी हो सकती है। जादूगोड़ा, नरवा और भाटीन जैसे यूनिट्स में समय-समय पर विरोध और कार्य बहिष्कार की स्थिति बनी है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी मांगों को समय पर नहीं सुना जा रहा, जिससे असंतोष गहराता जा रहा है।असिस्टेंट लेबर कमिश्नर चाईबासा के समक्ष बनी सहमति के बाद भी कुछ फैसलों के क्रियान्वयन में देरी से कर्मचारियों का भरोसा कमजोर हुआ है।

    रोटेशन नीति पर ‘सवाल ही सवाल

    कंपनी के भीतर रोटेशन नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कुछ विभागों में तबादले, तो कुछ में वर्षों से जमे अधिकारी, संवेदनशील पदों पर लंबे समय से एक ही चेहरे है। इससे कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या नीति समान रूप से लागू हो रही है या चयनात्मक तरीके से।

    यूसीआईएल प्रबंधन के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है

    उत्पादन को पटरी पर लाना, औद्योगिक शांति कायम रखना। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और जटिल हो सकती है। यूसीआईएल में मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका समान और प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सीएमडी डॉ. कंचन आनंद राव किस तरह उत्पादन और प्रबंधन के बीच संतुलन स्थापित कर कंपनी को फिर से स्थिरता की दिशा में ले जाते हैं। यूसील में लगातार विस्थापितों के द्वारा ओर ठेका मजदूरों के द्वारा हड़ताल किया जा रहा है जिसके कारण यूसील के छवि पूरी तरह से धूमिल होते जा रही है नए प्रबंधन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वही लगातार यूसिल के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाता जा रहा है।

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