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    सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय स्वागत योग्य; अनुसूचित समाज के अधिकारों पर डाका नहीं डालने देंगे : विहिप

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarMarch 25, 2026No Comments3 Mins Read
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    सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय स्वागत योग्य; अनुसूचित समाज के अधिकारों पर डाका नहीं डालने देंगे : विहिप

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    विश्व हिन्दू परिषद सिंहभूम विभाग के मंत्री अरूण सिंह ने कल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह निर्णय संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय और विधि के शासन को सुदृढ़ करने वाला है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि धर्मांतरण के पश्चात कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) की संवैधानिक श्रेणी में नहीं आता और ऐसे में उसे SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत संरक्षण प्राप्त नहीं हो सकता। यह निर्णय संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 की भावना के भी अनुरूप है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केवल हिन्दू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायी ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते हैं।

    उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने वाला है, जिनमें कुछ लोग धर्मांतरण के बाद भी पूर्व जातिगत पहचान के आधार पर संवैधानिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इस निर्णय से धर्मांतरण माफिया पर गहरी चोट लगी है। ईसाई व मुस्लिम नेता एक ओर तो कहते हैं कि उनका धर्म समतावादी है, उनके यहां जाति-पाति की व्यवस्था नहीं है वहीं, दूसरी ओर वे दलित ईसाई व दलित मुस्लिम जैसे शब्दों की रचना करके उनके लिए आरक्षण की मांग करते हैं जिससे उनके धर्मांतरण के कुचक्रों को गति मिल सके। अरुण सिंह ने कहा कि अब भारत की धरती में उनके कुचक्र नहीं चल सकेंगे।

    अनुसूचित जाति के अधिकार और संरक्षण का उद्देश्य ऐतिहासिक सामाजिक अन्याय को दूर करना है, जो विशेष रूप से हिन्दू समाज की संरचना में उत्पन्न हुआ था। अतः जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करता है, तो वह उस सामाजिक संदर्भ से भी स्वयं को अलग कर लेता है, जिसके आधार पर ये विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति पुनः हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म में लौटता है और समाज द्वारा उसे स्वीकार किया जाता है, तभी वह पुनः अनुसूचित जाति के अधिकारों का पात्र बन सकता है।

    अंत में डॉ. जैन ने कहा कि यह निर्णय देश में सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और न्याय की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विहिप के कार्यकर्ता देशभर में ऐसे लोगों की सूची बनाएंगे जिन्होंने अनुसूचित समाज के अधिकारों पर डाका डाला है और उनसे वे अधिकार छीनकर उन लोगों दिलाए जा सकें जो उनके वास्तविक अधिकारी हैं।

    सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय स्वागत योग्य; अनुसूचित समाज के अधिकारों पर डाका नहीं डालने देंगे : विहिप
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