बहरागोड़ा में स्वर्णरेखा किनारे मिला 226 किलो का जिंदा मिसाइल बम
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर के बहरागोड़ा स्थित स्वर्णरेखा नदी के तट पर उस समय हड़कंप मच गया, जब स्थानीय लोगों की नजर एक भारी-भरकम संदिग्ध वस्तु पर पड़ी। शुरुआत में लोगों को लगा कि यह कोई साधारण धातु का टुकड़ा या पुराना कबाड़ हो सकता है, लेकिन जब इसकी जानकारी पुलिस को दी गई और जांच शुरू हुई, तो मामला बेहद गंभीर निकला।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई सामान्य वस्तु नहीं, बल्कि करीब 226 किलो वजनी एक खतरनाक मिसाइल बम है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रारंभिक जांच में इस बम के सक्रिय यानी जिंदा होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटनास्थल पर तुरंत कार्रवाई सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे क्षेत्र को तत्काल आसपास के ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी पर रहने की सख्त हिदायत दी गई है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को और भी कड़ा कर दिया गया है।
बम निरोधक दस्ता और सेना अलर्ट मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बम निरोधक दस्ता को तुरंत अलर्ट किया गया। वहीं, इस खतरनाक बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने के लिए भारतीय सेना की विशेष तकनीकी टीम को भी बुलाया गया है।
प्रशासन के अनुसार, यह बम काफी पुराना प्रतीत हो रहा है, और संभावना जताई जा रही है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के समय का हो सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि सेना की जांच के बाद ही हो पाएगी।
अधिकारियों का बयान ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग ने सेना को पत्र लिखकर सहायता मांगी गई है
स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद से इलाके के लोगों में डर का माहौल नहीं जब की कौतुहुल का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी ऐसी घटना नहीं देखी। प्रशासन लगातार लोगों को सतर्क रहने और अफवाहों से दूर रहने की अपील कर रहा है।लेकिन स्थानीय लोग बम के साथ रील बनाने मे व्यस्त है
जब की सुरक्षा को लेकर विशेष अपील प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति घटनास्थल के आसपास जाने की कोशिश न करे। यह बम अत्यंत खतरनाक है और जरा सी लापरवाही बड़ा हादसा बन सकती है।
जांच जारी फिलहाल सेना की टीम के आने का इंतजार किया जा रहा है, जो इस बम की तकनीकी जांच करेगी और उसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि यह बम यहां कैसे पहुंचा और कब से इस क्षेत्र में पड़ा हुआ था।

