राष्ट्र संवाद संवाददाता
सरायकेला-खरसावां जिले के बिरसा मुंडा स्टेडियम में आयोजित होमगार्ड बहाली प्रक्रिया में इस बार एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। साधारण ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी गम्हरिया प्रखंड की बेटियों ने अपनी मेहनत, अनुशासन और जज़्बे के दम पर असाधारण सफलता हासिल कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच लगातार अभ्यास करने वाली इन बेटियों ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता। प्रशिक्षक प्रदीप कुमार के मार्गदर्शन में तैयार हुई इन बालिकाओं ने शारीरिक दक्षता की हर चुनौती को आत्मविश्वास के साथ पार किया।
*पहले ही प्रयास में सफलता का परचम*
प्रदीप के निर्देशन में प्रशिक्षण ले रही 11 महिला अभ्यर्थियों ने पहली ही बार में बहाली के सभी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा कर एक नई मिसाल कायम की। हाई जंप, लॉन्ग जंप और गोला फेंक जैसी प्रतियोगिताओं में उनके शानदार प्रदर्शन ने चयन प्रक्रिया में उन्हें अग्रणी बना दिया।
*इन बेटियों ने बढ़ाया क्षेत्र का मान*
इस उपलब्धि को हासिल करने वाली अभ्यर्थियों में निशा कुमारी, रायमणी हांसदा, सावित्री हांसदा, काजल हेमब्रम, रायबरी मार्डी, पानो हांसदा, पूजा मुर्मू, मनीषा दास, रिया दे, मंजू शर्मा और पुष्पा शामिल हैं।
*खुशियों के बीच सजी सफलता की कहानी*
सफलता के बाद रामचंद्रपुर फुटबॉल ग्राउंड में जश्न का माहौल रहा। प्रशिक्षक प्रदीप कुमार ने सभी सफल अभ्यर्थियों के साथ केक काटकर और मिठाइयां बांटकर खुशी साझा की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इन बेटियों के निरंतर परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का प्रतिफल है।
*प्रशिक्षण से बदल रही है युवाओं की दिशा*
प्रशिक्षक प्रदीप पिछले कई वर्षों से बिना किसी प्रशिक्षण शुल्क एवं निस्वार्थ भाव से काण्ड्रा क्षेत्र के युवाओं को सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा सेवाओं के लिए तैयार कर रहे हैं। उनके प्रयासों से कई युवा पहले ही सरकारी सेवाओं में अपनी पहचान बना चुके हैं।
प्रदीप की यह ताजी सफलता केवल 11 बेटियों की नहीं, बल्कि उस बदलते ग्रामीण भारत की तस्वीर है, जहां बेटियां अब सीमाओं को तोड़कर नए आयाम गढ़ रही हैं। यह कहानी हर उस बेटी के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रही है।

