लेखक: राष्ट्र संवाद संवादाता
रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों और विभिन्न संगठनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को भंग करने और पेपर लीक मामलों की न्यायिक जांच कराने की मांग उठाई। इस आंदोलन में वामपंथी छात्र संगठन आइसा (AISA), सीपीआई-एमएल (CPI-ML) और आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए।
अल्बर्ट एक्का चौक पर छात्रों का प्रदर्शन, NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी
राजधानी राँची के अल्बर्ट एक्का चौक पर छात्रों के मुद्दे को लेकर विभिन्न संगठनों का साझा रूप से, केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ, हाथों में तख्तियां लेकर किया जोरदार प्रदर्शन
छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करो, मोदी सरकार, तेरी तानाशाही नहीं चलेगी, पेपर लीक बंद करो, छात्रों के भविष्य का व्यापार करना बंद करो। छात्रों के मुद्दे, खासकर नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में व्याप्त धांधलियों के खिलाफ वामपंथी छात्र संगठन आयशा (AISA), सीपीआई-माले (CPI-ML), और आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा, राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर छात्रों के समर्थन में किया गया जोरदार प्रदर्शन।
प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, नीट यूजी परीक्षा और सहित अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों की न्यायिक जाँच के अलावा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को भंग करने की मांग किया गया।
NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा कि NEET UG 2024 के पेपर लीक ने लाखों छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा दिया है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इस मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराए। साथ ही, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे भंग कर नई पारदर्शी संस्था बनाने की मांग की गई। प्रदर्शन में शामिल छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने पद से त्यागपत्र दें।
इस आंदोलन को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और सीपीआई-एमएल के वरिष्ठ नेताओं का भी समर्थन प्राप्त हुआ। उन्होंने केंद्र सरकार पर शिक्षा के व्यावसायीकरण और छात्रों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हाथों में तख्तियां ली हुई थीं जिन पर लिखा था – “छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करो” और “NEET पेपर लीक की न्यायिक जांच हो”।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार पेपर लीक की घटनाएं परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। NEET परीक्षा भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है और इसकी शुचिता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस संबंध में [INTERNAL_LINK_HOLDER] पर विस्तृत विश्लेषण पढ़ा जा सकता है।
आगे की रणनीति और छात्रों का संकल्प
छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर अविलंब कार्रवाई नहीं की गई तो वे देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की है। रांची का यह प्रदर्शन इसी कड़ी का एक हिस्सा था, जिसमें सैकड़ों छात्रों ने अपनी आवाज बुलंद की।
अंत में, प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को संबोधित मांगें शामिल थीं। ज्ञापन में पेपर लीक के दोषियों पर कठोर कार्रवाई, पीड़ित छात्रों को मुआवजा और पुनर्परीक्षा की व्यवस्था करने की मांग प्रमुख थी।

