राष्ट्र संवाद की साज-सज्जा सुधारने की जरूरत:आनंद सिंह
वरिष्ठ पत्रकार
राष्ट्र संवाद के 25 वर्ष पूर्ण होने पर श्री देवानंद सिंह और उनकी टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं।
आज के दौर में अखबार चलाना बहुत ही बड़ा काम है।
इसमें जोखिम बहुत हैं।
राष्ट्रसंवाद के पास संसाधन कम हैं, लेकिन यह बीते 25 साल से लगातार छप रहा है।
यह देवानंद सिंह जी की स्ट्रेंग्थ है।
इसके लिए उन्हें सलाम।
8 पन्ने के इस अखबार को मैं बीते दो साल से बिना नागा किये पढ़ते रहा हूं।
मोटे तौर पर जो हमारे आस-पास की खबरें हैं, वो हमें मिल जाती हैं।
बिहार, देश-विदेश की भी खबरें रहती हैं।
अखबार की साज-सज्जा पर थोड़ा ध्यान देना होगा।
अखबार एक सिमिट्री में होना चाहिए।
उसका यहां सर्वथा अभाव दिखता है।
ले-आउट आपकी पर्सनाल्टी के आउटलुक की तरह होता है।
आप क्या पहनते हैं, कैसे पहनते हैं, किस मौके पर पहनते हैं, यह सामने वाले को बेहद प्रभावित करता है।
उसी प्रकार अखबार का एक ले-आउट होता है।
एक गेटअप होता है।
फोंट का साइज, फोटो का चयन, फोटो की साइज, फोटो एडिटंड है या नहीं, यह बड़ा मायने रखता है।
बतौर संपादक आपको तय करना होता है कि आज की खास खबर क्या है, लीड क्या है, एंकर क्या है।
यह पहले पेज से आखिरी पेज तक होना चाहिए।
राष्ट्र संवाद में फोंट की समस्या है।
खबरों के प्रदर्शन की समस्या है।
इस पर ध्यान देना होगा।
एक सिमिट्री में अखबार को निकालना होगा।
बड़े-बड़े लेख पढ़ने वाले लोग कम हैं।
अब टिप्सनुमा लेख लोग ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि किसी के पास वक्त नहीं है।
बड़े-बड़े अखबार अब संपादकीय पन्ने पर भी प्रयोग कर रहे हैं।
वो लेख में भी टिप्सनुमा लिखवा रहे हैं।
ये काफी शोध के बाद लोगों ने तय किया कि 500 शब्द पढ़ने में भी लोगों के पसीने छूट जाते हैं।
पहले तो 2000 शब्दों को भी लोग बड़े चाव से पढ़ते थे।
तब उनके पास वक्त बहुत था।
अब वक्त भी नहीं है और अखबार से पहले वेबसाइट्स पर खबरें आ जाती हैं।
अखबार पढ़ने में उनका मन कम लगता है।
बदलते दौर के साथ इसे अगर राष्ट्र संवाद ने अंगीकार कर लिया तो बेहतर होगा।
देवानंद सिंह जी मेरे अग्रज हैं।
जुझारु प्रवृति के हैं।
25 साल से जिस संघर्ष और शिद्दत से वह कम संसाधनों के बीच राष्ट्र संवाद का प्रकाशन कर रहे हैं, वह कोई हंसी ठट्ठा नहीं है।
बहुत संघर्ष कर रहे हैं देवानंद जी।
उनके संघर्ष को मेरा सलाम!
राष्ट्र संवाद उत्तरोत्तर प्रगति करे, अपने अंदर पृष्ठ सज्जा को लेकर सुधार करे, यही आग्रह है।
एक बार फिर से राष्ट्रसंवाद को शानदार 25 साल पूर्ण करने पर घनघोर बधाई!!
आनंद सिंह
वरिष्ठ पत्रकार

