जादूगोड़ा: पोटका प्रखंड के चंदनपुर गांव स्थित आदिवासियों के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल ऑल इंडिया सरना धर्म आसरा आश्रम में बाहा-बोगा पर्व के अवसर पर आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा। आश्रम के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस भव्य समारोह में झारखंड सहित चार राज्यों से माझी बाबा, ग्राम प्रधान, नायके एवं समाज के प्रमुख लोग शामिल हुए। हजारों श्रद्धालु मरांग बुरू से मन्नतें मांगने पहुंचे। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।

आश्रम के सचिव करण माझी ने बताया कि आदिवासियों की सरना धर्म की पूजा-पद्धति धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। इसे संरक्षित करने के उद्देश्य से यहां प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है, जहां सरना धर्म की परंपराएं, देवी-देवताओं की जानकारी तथा रूढ़ि-प्रथाओं के विधि-विधान की शिक्षा दी जाती है, ताकि झारखंड में सरना संस्कृति सुरक्षित रह सके।
चंदनपुर गांव अपनी विशिष्ट सामाजिक व्यवस्था के लिए भी जाना जाता है। यहां शराब की बिक्री और सेवन पूर्णतः प्रतिबंधित है। जादूगोड़ा से लगभग 15 किलोमीटर और पोटका प्रखंड कार्यालय से 20 किलोमीटर दूर, ग्वालकाटा पंचायत अंतर्गत स्थित यह गांव पथरीले रास्तों और बुनियादी समस्याओं से जूझने के बावजूद पूरे जिले में एक आदर्श गांव के रूप में पहचाना जाता है। यहां त्योहारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी हड़िया की बिक्री और सेवन पर रोक है।
कार्यक्रम में चुनियन राघुन मुर्मू (पंडित रघुनाथ मुर्मू के पोते), पूर्व जिला परिषद सह भाजपा नेता लव सरदार, यूसील अधिकारी डी. हांसदा सहित चार राज्यों से आए माझी बाबा एवं नायके उपस्थित रहे। वक्ताओं ने यूसील द्वारा आश्रम भवन निर्माण में दिए गए सहयोग की सराहना की और राज्य सरकार से गांव में सड़क व अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा मिल सके।

आश्रम केवल धार्मिक शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी प्रमुख मंच बन चुका है। यहां बाल विवाह, अंधविश्वास, डायन प्रथा जैसी कुरीतियों के विरुद्ध लोगों को जागरूक किया जाता है। साथ ही जंगलों की कटाई रोकने और पहाड़ों में आग से बचाव के प्रशिक्षण भी दिए जाते हैं। इस प्रकार चंदनपुर का सरना धर्म आसरा आश्रम आस्था के साथ-साथ सामाजिक सुधार का भी सशक्त केंद्र बन गया है। 🌿

