महेश अग्रवाल की ‘लूट का खेल’: गोचर भूमि कब्जा, अवैध खनिज निकासी और ब्रोकर से साठगांठ के आरोप , फिर भी गिरफ्तारी क्यों नहीं? CM माझी की चुप्पी पर सवाल
राष्ट्र संवाद संवाददाता –
बारबिल/क्योंझर (ओडिशा): ओडिशा के खनिज-समृद्ध बारबिल–क्योंझर क्षेत्र में एकीकृत लौह-अयस्क संचालन का “मॉडल” कही जाने वाली श्री मेटालिक्स लिमिटेड (SML) अब गंभीर आरोपों के घेरे में है। कंपनी के कर्ताधर्ता महेश अग्रवाल पर गोचर भूमि हड़पने, अवैध खनिज निकासी कराने और कथित ब्रोकर राजेश जायसवाल से साठगांठ कर खनिज कारोबार चलाने जैसे संगीन आरोप सामने आ रहे हैं। सवाल यह है कि इतने आरोपों और दस्तावेज़ी संकेतों के बावजूद अब तक जेल क्यों नहीं, और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी इस पूरे मामले पर चुप क्यों हैं?
भारतीय खान ब्यूरो (IBM) की सितंबर 2023 की निरीक्षण रिपोर्ट ने क्योंझर जिले की खंडबंध (Khandbandh) लौह-अयस्क खदान में उत्पादन और डिस्पैच आंकड़ों में गंभीर विसंगतियों की ओर इशारा किया था। रिपोर्ट में खनिज संरक्षण एवं विकास नियम (MCDR) के उल्लंघन का उल्लेख है और कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा गया था। यह रिपोर्ट 2023–24 के अनुपालन डेटाबेस का हिस्सा है, जिससे लीज़ औपचारिक निगरानी में आ गई।
इसी बीच, स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि महेश अग्रवाल के संरक्षण में गोचर भूमि पर कब्जा कर खनन व सहायक गतिविधियां संचालित की गईं और अवैध निकासी को वैध दिखाने के लिए नेटवर्क सक्रिय रहा। आरोपों में यह भी कहा जा रहा है कि इस नेटवर्क का संचालन कथित ब्रोकर राजेश जायसवाल की भूमिका के बिना संभव नहीं था। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच का विषय है, लेकिन क्षेत्र में प्रवर्तन एजेंसियों की हालिया कार्रवाइयों ने संदेह को और गहरा कर दिया है।
न्यायालयीन रिकॉर्ड बताते हैं कि SML 2017 से 2023 के बीच NCLT और उच्च न्यायालयों में दिवाला (इंसॉल्वेंसी) और वैधानिक देयों से जुड़े कई मुकदमों में उलझी रही। संचालन जारी रहा, पर इन मामलों ने कंपनी की वित्तीय अनुशासन और अनुपालन संस्कृति पर प्रश्नचिह्न लगाए।
पर्यावरणीय मोर्चे पर भी कंपनी पर दबाव है। नियामकीय पोर्टलों के अनुसार, SML क्योंझर के अनरा, लोइदापाड़ा और रुगुड़ी क्षेत्रों में पेलेटाइजेशन, स्पंज आयरन और बेनेफिसिएशन इकाइयां चलाती है। छमाही रिपोर्टों में प्रदूषण-नियंत्रण उपायों का दावा है, लेकिन नियामकों की टिप्पणियां बताती हैं कि निरंतर निगरानी जारी है।
2025 में बारबिल–क्योंझर क्षेत्र में अवैध खनन/परिवहन पर व्यापक छापेमारी हुई, जिसमें सैकड़ों टन अयस्क और कई वाहन जब्त किए गए। भले ही दर्ज एफआईआर में SML का नाम सीधे न हो, पर क्षेत्र के सभी लीज़धारकों पर शिकंजा कस गया है। इसी पृष्ठभूमि में महेश अग्रवाल पर लगे आरोपों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और ट्रांसपोर्ट ठेकेदारों द्वारा भुगतान में देरी और विवादों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ये आरोप स्वतंत्र पुष्टि के अधीन हैं, पर दिवाला दौर के बाद कंपनी की व्यावसायिक विश्वसनीयता पर उठते सवालों को हवा देते हैं।
प्रकाशन तक श्री मेटालिक्स लिमिटेड या महेश अग्रवाल की ओर से IBM रिपोर्ट, गोचर भूमि, अवैध निकासी या कथित साठगांठ के आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। बारबिल और भुवनेश्वर कार्यालयों से संपर्क के प्रयास भी निष्फल रहे।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दस्तावेज़, निरीक्षण रिपोर्टें और स्थानीय आरोप एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं, तो कानूनी कार्रवाई कब होगी? और यदि सब कुछ ठीक है, तो मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी इन आरोपों पर स्पष्ट बयान क्यों नहीं दे रहे? जवाबदेही की यह चुप्पी ही फिलहाल सबसे बड़ा विवाद बनती जा रही है।

