जमशेदपुर मुखिया कान्हु मुर्मू समेत माझी बाबा को रेलवे कैंप कोर्ट से मिली बड़ी राहत
राष्ट्र संवाद संवाददाता
पोटका। रेलवे कैंप कोर्ट जमशेदपुर में हुई सुनवाई के दौरान मुखिया कानू मुर्मू समेत मांझी बाबा को न्यायालय ने सभी आरोपों से पूर्णतः बरी कर दिया। यह फैसला आदिवासी समाज के अधिकारों और लोकतांत्रिक आंदोलन की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज के युवा एवं समर्थक उपस्थित रहे। विदित हो कि आदिवासी हूल वैसी के आह्वान पर वर्ष 2023 में ओल चिकी लिपि से झारखंड के सभी स्कूलों में शिक्षा प्रारंभ कराने की मांग को लेकर एक दिवसीय झारखंड बंद किया गया था। इस बंद का कोल्हान प्रमंडल में व्यापक और ऐतिहासिक असर देखने को मिला। बंद के दौरान सभी प्रकार का परिवहन पूरी तरह ठप रहा, वहीं बादाम पहाड़ रेलवे मार्ग भी पूर्णतः बंद रहा।
इस आंदोलन के क्रम में समाज के प्रमुख जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं—मुखिया श्री कान्हू मुर्मू, माझी बाबा विश्वनाथ मार्डी, लखन हेंब्रम एवं गुंजाई सोरेन—पर सरकारी कार्य में बाधा तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।
फैसले के बाद मुखिया श्री कान्हू मुर्मू ने कहा कि
“यह लड़ाई किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के अधिकार और अस्मिता की है। ओल चिकी लिपि को शिक्षा व्यवस्था में उसका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा, चाहे कितनी भी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।”
यह निर्णय न केवल न्याय की जीत है, बल्कि यह भी स्पष्ट संदेश देता है कि संविधान सम्मत, शांतिपूर्ण जनआंदोलनों को दबाया नहीं जा सकता।

