Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » जी-राम जी बिल पर सियासी संग्राम: राष्ट्रपति की मुहर से पहले क्यों उलझा लोकतांत्रिक पेच?
    Breaking News Headlines बेगूसराय राष्ट्रीय संपादकीय

    जी-राम जी बिल पर सियासी संग्राम: राष्ट्रपति की मुहर से पहले क्यों उलझा लोकतांत्रिक पेच?

    Sponsored By: सोना देवी यूनिवर्सिटीDecember 22, 2025No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    देवानंद सिंह
    मनरेगा की जगह लाने के लिए प्रस्तावित ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G) बिल’ अब केवल एक नीति दस्तावेज नहीं रहा, बल्कि वह सत्ता और विपक्ष के बीच संवैधानिक मर्यादा बनाम राजनीतिक रणनीति की नई जंग का केंद्र बन गया है। संसद से पारित होने के बाद भी राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहे इस बिल पर संसद की स्थायी समिति की बैठक बुलाए जाने से विवाद गहराता दिख रहा है।

     

    ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद सप्तगिरी शंकर उलाका द्वारा 29 दिसंबर को बुलाई गई बैठक ने इस टकराव को खुलकर सामने ला दिया है। बैठक के एजेंडे में न केवल VB-G RAM G बिल पर ग्रामीण विकास मंत्रालय की प्रस्तुति शामिल है, बल्कि इसकी यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना से तुलना भी प्रस्तावित है। यही तुलना सत्तारूढ़ बीजेपी को सबसे अधिक खटक रही है।

     

     

    बीजेपी सांसदों का तर्क है कि कोई भी बिल तब तक कानून नहीं माना जा सकता, जब तक उस पर राष्ट्रपति की मुहर न लग जाए और गजट अधिसूचना जारी न हो। पार्टी के सांसद विवेक ठाकुर ने इसे “विचारहीनता” करार देते हुए कहा कि संसद से हाल ही में पारित बिल पर स्थायी समिति द्वारा चर्चा करना संसदीय परंपराओं के विरुद्ध है। बीजेपी का यह भी कहना है कि स्थायी समितियों का दायरा केवल लागू कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा तक सीमित होता है, न कि राष्ट्रपति की स्वीकृति से पहले किसी विधेयक पर राजनीतिक बहस तक।

    दूसरी ओर, कांग्रेस इस कदम को लोकतांत्रिक निगरानी का हिस्सा बता रही है। पार्टी के भीतर यह संदेश देने की कोशिश है कि VB-G RAM G बिल मनरेगा की आत्मा को कमजोर कर सकता है, और इसलिए उस पर विस्तृत चर्चा जरूरी है। समिति की बैठक के जरिए कांग्रेस न केवल सरकार से जवाब चाहती है, बल्कि ग्रामीण रोजगार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक विमर्श को सार्वजनिक मंच पर लाना भी चाहती है।

     

     

    असल पेच यहीं फंसा है—क्या संसद से पारित लेकिन राष्ट्रपति की स्वीकृति से पहले किसी बिल पर समिति की औपचारिक चर्चा की जा सकती है? संविधान इसकी स्पष्ट मनाही नहीं करता, लेकिन संसदीय परंपराएं आम तौर पर ऐसे कदम से बचने की सलाह देती हैं। यही अस्पष्टता अब राजनीतिक हथियार बन चुकी है।

     

     

    VB-G RAM G बिल पर यह विवाद सिर्फ रोजगार गारंटी की नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संसद की समितियों की भूमिका, विपक्ष की ताकत और सत्ता की संवेदनशीलता का भी परीक्षण है। राष्ट्रपति की मंजूरी से पहले उठे इस सवाल ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में ग्रामीण रोजगार नीति के साथ-साथ संसदीय मर्यादाओं की व्याख्या भी राजनीतिक बहस के केंद्र में रहने वाली है।
    यह टकराव बताता है कि भारत के लोकतंत्र में कानून बनना जितना अहम है, उतना ही अहम है उस प्रक्रिया पर होने वाला राजनीतिक और संवैधानिक संवाद।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleगणितज्ञ रामानुजन जो अंकों-सूत्रों एवं प्रमेयों से खेलते थे
    Next Article सलगाझुड़ी में ट्रेन ठहराव को लेकर CPI का मशाल जुलूस

    Related Posts

    भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: व्यवस्था सवालों में, राष्ट्रीय बहस

    June 21, 2026

    SIR 2026: किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा

    June 21, 2026

    राम मंदिर के चढ़ावे पर चुप्पी क्यों? जवाबदेही का सवाल

    June 21, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: व्यवस्था सवालों में, राष्ट्रीय बहस

    SIR 2026: किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा

    राम मंदिर के चढ़ावे पर चुप्पी क्यों? जवाबदेही का सवाल

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला: फुटपाथ पर मौलिक अधिकार और अतिक्रमण की हकीकत

    The Bharat Tiwari Encounter: A National Debate on Justice, Accountability, and Public Trust

    त्रिकोणीय जंग में उत्तराखंड की राजनीति का भविष्य

    स्लम क्षेत्र के बच्चों को योग से जोड़ने की अनूठी पहल, योग दिवस पर सफल आयोजन

    जमशेदपुर महानगर के सभी मंडलों में भाजपा ने पूरे मनोयोग से मनाया 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

    भरत तिवारी के कथित फर्जी एनकाउंटर के विरोध में साकची में कैंडल मार्च, निष्पक्ष जांच की मांग

    अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जिले में सामूहिक योगाभ्यास, उपायुक्त राजीव रंजन ने दिया स्वस्थ जीवन का संदेश

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.