“संस्कृति की धरती पर – कुटे आदिवासी महोत्सव यात्रा”
राष्ट्र संवाद सं
रांची के मोरहाबादी मैदान में सजे “कुटे आदिवासी महोत्सव यात्रा” में आज जनसैलाब उमड़ा हुआ था। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की गूंज, रंग-बिरंगे परिधानों में सजे नर्तक-नर्तकियों का उल्लास, और हर चेहरे पर अपनी संस्कृति के प्रति गर्व झलक रहा था। इसी बीच मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्रनाथ महतो।
जैसे ही उन्होंने दीप प्रज्वलित किया, पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति हमारी पहचान है। जब तक हम अपनी परंपराओं को संजोए रखेंगे, तब तक हमारी जड़ें मजबूत रहेंगी।” उनके शब्दों ने उपस्थित युवाओं के मन में गर्व और जिम्मेदारी की भावना जगा दी।
महोत्सव में पारंपरिक हथकरघा, जनजातीय व्यंजन, लोकगीत और नृत्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। रवीन्द्रनाथ महतो ने स्थानीय कलाकारों को सम्मानित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन न केवल संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज को एकता के सूत्र में बांधते हैं।
शाम ढलते-ढलते जब अलाव की रोशनी में नृत्य चलता रहा, तो लगा जैसे धरती खुद अपनी धड़कनों पर थिरक रही हो — यही थी रांची की पहचान, यही थी “कुटे आदिवासी महोत्सव यात्रा” की आत्मा।

