तीन दशक पुरानी दुश्मनी में दरोगा ने फंसाया निर्दोष अमरेंद्र कुमार को अफीम केस में, जांच में खुली पोल खूंटी एसपी ने किया निलंबित
आरोपी दरोगा दो-तीन महीने में सेवानिवृत्त होने वाले थे
राष्ट्र संवाद संवाददाता
राँची। झारखंड पुलिस में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। खूंटी जिले के सायको थाना क्षेत्र में तैनात दरोगा रामसुधीर सिंह ने निजी रंजिश के चलते एक निर्दोष व्यक्ति को अफीम की खेती के फर्जी केस में आरोपी बना दिया। मामला सामने आने के बाद खूंटी एसपी ने दरोगा को निलंबित कर दिया है और पुलिस मुख्यालय को जांच रिपोर्ट भेजी है।
क्या है पूरा मामला :
सायको थाने के केस संख्या 13/25 में दरोगा रामसुधीर सिंह अनुसंधान पदाधिकारी थे। इस केस में लाखा पाहन नामक व्यक्ति मुख्य आरोपी था। दरोगा ने केस डायरी में दर्ज किया कि लाखा पाहन और अमरेंद्र कुमार (बेगूसराय निवासी) की मुलाकात सितंबर 2024 में सायको बाजार में हुई, जहां अमरेंद्र ने उसे 25 हजार रुपये देकर अफीम की खेती करने को कहा। इसी आधार पर अमरेंद्र को केस में आरोपी बना दिया गया।
भाई की शिकायत पर खुली सच्चाई :
अमरेंद्र के भाई मृत्युंजय कुमार ने जब मामले की शिकायत डीजीपी और खूंटी एसपी से की, तब जांच का आदेश दिया गया। एसडीपीओ खूंटी की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि दरोगा की अमरेंद्र के पिता से साल 1996 से जमीनी विवाद को लेकर दुश्मनी थी। इसी पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए उसने झूठा केस गढ़ा।
जांच में उजागर हुआ सच :
सीडीआर और लोकेशन जांच से साबित हुआ कि अमरेंद्र कुमार कभी खूंटी या सायको नहीं गए, और न ही लाखा पाहन कभी बेगूसराय पहुंचा। दोनों एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे। यह भी सामने आया कि दरोगा ने केस डायरी में झूठे बयान जोड़कर अमरेंद्र को फंसाने की कोशिश की। जब अपनी गलती पकड़ी जाने की आशंका हुई, तो उसने लाखा पाहन पर ही पूरा दोष मढ़ने की कोशिश की।
एसपी ने की कार्रवाई :
जांच रिपोर्ट में दरोगा को दोषी पाए जाने पर खूंटी एसपी ने कर्तव्य में लापरवाही, पद के दुरुपयोग और पुलिस की छवि धूमिल करने के आरोप में रामसुधीर सिंह को निलंबित कर दिया। बताया जा रहा है कि आरोपी दरोगा दो-तीन महीने में सेवानिवृत्त होने वाले थे। जांच ने साबित किया — दुश्मनी में दरोगा ने कानून को हथियार बनाया, लेकिन सच सामने आने पर खुद फँस गया।

