- कड़वा सच
पेट्रोल पंपों की धांधली पर हो सख्त कार्रवाई
राष्ट्र संवाद संवाददाता
पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी की जाती है, यह बात किसी से छुपी नहीं है। ऐसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही है। सोमवार को जमशेदपुर के साकची इलाके में स्थित इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप पर भी ऐसी ही घटना हुई, जब एक कार में 59 लीटर के पेट्रोल की जगह 55 लीटर ही तेल पाया गया, जिसके बाद वहां हंगामा हो गया। इस तरह पेट्रोल पंप वाला कितने लोगों की चूना लगा रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
पेट्रोल पंपों पर यह खेल नया नहीं है। कहीं रिमोट कंट्रोल चिप लगाकर मशीन की नाप-तौल से छेड़छाड़ की जाती है, तो कहीं पाइपलाइन में गैजेट फिट करके पेट्रोल की धारा को नियंत्रित किया जाता है। ग्राहक सोचता है कि मीटर पर जितना दिख रहा है, उतना ही पेट्रोल टंकी में जा रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और होती है।
ऐसी धांधली का सबसे बड़ा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है। लोग दिन-रात मेहनत करके अपनी गाड़ी में ईंधन भरवाते हैं, लेकिन बदले में उन्हें ठगी मिलती है। सरकार की पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स नीति पहले ही उपभोक्ता की जेब ढीली कर रही है, ऊपर से पंप मालिकों की यह मिलावटखोरी जनता पर दोहरी मार डालती है।
हैरानी की बात यह है कि ऐसी घटनाओं के उजागर होने के बाद भी दोषी पंप मालिक अक्सर बच निकलते हैं। कुछ जुर्माना भरकर या ऊंचे राजनीतिक-संबंधों के दम पर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। यही कारण है कि ग्राहकों की ठगी का यह सिलसिला थमता नहीं।
यह कड़वा सच है कि पेट्रोल पंपों की पारदर्शिता पर भरोसा करना अब आसान नहीं रहा। जब तक प्रशासन सख्त कार्रवाई कर दोषियों को सजा नहीं देगा और नियमित जांच की पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं होगी, तब तक साकची जैसे मामलों में जनता को ही चुपचाप चूना लगना पड़ेगा।

