Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » क्या वोटर अधिकार यात्रा बिहार में कांग्रेस के लिए करेगी संजीवनी का काम ?
    Breaking News Headlines उत्तर प्रदेश ओड़िशा खबरें राज्य से झारखंड पटना पश्चिम बंगाल बिहार राजनीति राष्ट्रीय संपादकीय

    क्या वोटर अधिकार यात्रा बिहार में कांग्रेस के लिए करेगी संजीवनी का काम ?

    News DeskBy News DeskAugust 27, 2025No Comments7 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    क्या वोटर अधिकार यात्रा बिहार में कांग्रेस के लिए करेगी संजीवनी का काम ?
    देवानंद सिंह
    बिहार की राजनीति हमेशा से प्रयोगों और अप्रत्याशित घटनाक्रमों के लिए जानी जाती रही है। कभी जेपी आंदोलन, कभी मंडल क्रांति, कभी महागठबंधन का उत्थान तो कभी एनडीए का पुनरुत्थान, हर दौर में बिहार ने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दी है। इसी परंपरा की कड़ी में अब राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को देखा जा रहा है। यह यात्रा केवल एक चुनावी कवायद नहीं, बल्कि एक व्यापक संदेश है कि विपक्ष अब महज़ रैलियों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि सीधे गांव-गांव, गली-गली, चौपाल-चौपाल पहुंचकर जनता से संवाद करना चाहता है।

     

    लखीसराय ज़िले के निस्ता गांव से जब यह कारवां गुज़रा तो दृश्य किसी चुनावी शो की तरह नहीं बल्कि एक सामाजिक उत्सव की तरह प्रतीत हुआ। भीगी सड़कों से गुजरते वाहनों के साथ कांग्रेस-केंद्रित गीतों की गूंज सुनाई दी, डीजे पर बजते गाने और झंडों की कतारें यह स्पष्ट करती थीं कि यह यात्रा ‘संगठित संदेश’ देने के लिए निकली है। ग्रामीण गलियों में जमा भीड़, बच्चों का उत्साह और महिलाओं की जिज्ञासा इस यात्रा को केवल राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामुदायिक अनुभव बना देती है।

    गांव के लोग महसूस कर रहे थे कि राजनीति अब टीवी की स्क्रीन या अख़बार की सुर्खियों तक सीमित नहीं, बल्कि उनके दरवाज़े तक आ चुकी है। यही कारण है कि पुतुल देवी जैसी सफाईकर्मी से लेकर बुनकर मोहल्ले की बीबी कैसर जैसी महिलाएं इस यात्रा को अपनी आकांक्षाओं से जोड़ने लगीं। यात्रा का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि भीड़ के बीच सबसे अधिक कांग्रेस के झंडे दिखाई दिए। राजद या वामपंथी दलों के झंडे कहीं-कहीं ही नजर आए। यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या कांग्रेस यह यात्रा केवल महागठबंधन की साझी पहल के रूप में कर रही है, या यह उसका खुद का सांगठनिक पुनर्जीवन अभियान है?

     

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह संगठन को सक्रिय करने की एक लंबी रणनीति का हिस्सा है। कृष्णा अल्लावरू के प्रभारी बनने के बाद से बिहार कांग्रेस ने ‘हर घर झंडा’ जैसे अभियान चलाए और कार्यकर्ताओं को साफ संदेश दिया गया कि केवल झंडे लगाने से बात नहीं बनेगी, भीड़ और सक्रियता लानी होगी। इस दृष्टि से यात्रा कांग्रेस के लिए एक ‘लिटमस टेस्ट’ भी है। राजद के नेता हालांकि इसे गठबंधन धर्म का हिस्सा बताते हैं, लेकिन सच यह है कि कांग्रेस इस मौके का इस्तेमाल खुद को सहायक दल से आगे बढ़ाकर एक ‘समान साझेदार’ के रूप में स्थापित करने के लिए कर रही है। यात्रा में दिखाई देने वाली भीड़ न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं की थी, बल्कि इसमें आम लोग भी अपने सवालों और जिज्ञासाओं के साथ शामिल हुए। यही कारण है कि भीड़ का पैटर्न ‘मिक्सड’ और ‘ऑर्गेनिक’ दोनों था। किसी भी आंदोलन की वास्तविक ताक़त यही होती है कि वह केवल कार्यकर्ताओं की लामबंदी तक सीमित न रहे बल्कि जनता की वास्तविक भागीदारी से जीवंत बने।

     

    राहुल गांधी को देखने और छूने की ललक, महिलाओं का हाथ हिलाकर अभिवादन करना और नौजवानों का आगे बढ़कर शामिल होना, यह सब इस यात्रा को एक नया रंग दे रहा था, हालांकि कई लोग इस बात से निराश भी थे कि सुरक्षा घेरे के कारण राहुल सीधे जनता से उतना संवाद नहीं कर पा रहे थे। यात्रा का मूल मकसद मतदाता सूची से नामों के गायब होने के मुद्दे को उठाना था। चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान लगभग 65 लाख नामों के हटने का आरोप विपक्ष ने लगाया है। राहुल गांधी बार-बार दोहरा रहे हैं कि हम वोट चोरी नहीं होने देंगे।

     

    लेकिन जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ती गई, मुद्दों का दायरा भी व्यापक होता गया। बेरोज़गारी, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, उद्योगों की बदहाली, महिला सशक्तिकरण और यहां तक कि अग्निवीर योजना जैसे विषय भी इसमें शामिल हो गए। भागलपुर के बुनकर मोहल्लों में खड़ी मुस्लिम महिलाएं अपनी रोज़ी-रोटी और सुरक्षा की चिंता साझा करती हैं, वहीं लखीसराय में चाय पीते नौजवान अजय कुमार शर्मा रोजगार और भविष्य की स्थिरता की बात करते हैं। आशा कार्यकर्ता 26 हज़ार रुपये मानदेय की मांग रखती हैं, और गन फैक्ट्री संघ अपने परिवारों की रोज़ी-रोटी का सवाल उठाता है। इस तरह यात्रा एक प्रकार से ‘चलता-फिरता ज्ञापन मंच’ बन गई है, जहां जनता अपनी समस्याओं को सीधे नेताओं के सामने रख पा रही है।

     

    इस यात्रा में जनता का मूड मिश्रित दिखाई देता है। एक ओर उम्मीद है, दूसरी ओर गुस्सा भी। कुछ लोग इस वजह से निराश हैं कि राहुल आम गरीब से हाथ नहीं मिला पा रहे, वहीं कुछ लोग राहुल को अपने परिवार का संरक्षक मानती हैं। यह मिश्रण बताता है कि जनता केवल नारों से संतुष्ट नहीं, बल्कि ठोस संवेदनशीलता और संवाद चाहती है। महागठबंधन में कांग्रेस, राजद, भाकपा माले और वीआईपी शामिल हैं। यात्रा में इन दलों की साझा मौजूदगी गठबंधन की ताक़त को दिखाती है, लेकिन झंडों की असमानता और कांग्रेस की प्रमुखता यह संकेत भी देती है कि कांग्रेस सत्ता समीकरण में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।

    तेजस्वी यादव का राहुल गांधी को पर्याप्त स्पेस देना और कन्हैया कुमार, पप्पू यादव जैसे चेहरों को सहजता से स्वीकार करना यह दिखाता है कि तेजस्वी भी जानते हैं कि सत्ता में वापसी अकेले संभव नहीं। कांग्रेस का मज़बूत होना राजद के लिए भी लाभकारी है। हाल ही में जब राहुल से पूछा गया कि तेजस्वी ने उन्हें प्रधानमंत्री उम्मीदवार बताया है तो क्या कांग्रेस बिहार में तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने का समर्थन करेगी, उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज़ किया और केवल ‘अच्छी साझेदारी’ और ‘परस्पर सम्मान’ की बात कही। इसका अर्थ साफ है कि गठबंधन अभी अपने समीकरण सार्वजनिक करने से बच रहा है। यात्रा के आगे बढ़ने के साथ ही एनडीए ने भी इसे निशाने पर लिया। चिराग पासवान ने राजद को कांग्रेस का पिछलग्गू बताया और जेडीयू नेताओं ने कहा कि कांग्रेस लालू के साथ रहकर कभी मज़बूत नहीं हो सकती। यह वही पुराना हथियार है गठबंधन की भीतरी दरारों को उभारना, लेकिन ज़मीनी स्तर पर यात्रा का असर साफ महसूस हो रहा है। भीड़, मीडिया की रिपोर्टिंग और जनता की सहभागिता यह संकेत देती है कि महागठबंधन की तालमेल की स्थिति इस समय संतोषजनक है।

     

    विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की यात्राएं जनता में ऊर्जा और यूफोरिया पैदा करती हैं, लेकिन असली चुनौती इस ऊर्जा को बनाए रखने की होती है। बिहार जैसे युवा बहुल प्रदेश में यदि युवाओं का जुड़ाव कायम रहा तो यात्रा चुनावी नतीजों में भी असर दिखा सकती है। झंडों और सक्रियता से यह साफ है कि कांग्रेस अब बिहार में सहायक दल की भूमिका से आगे बढ़ना चाहती है।
    राहुल को स्पेस देना और अन्य युवा चेहरों को स्वीकार करना उनकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। उम्मीद और गुस्सा दोनों मौजूद हैं, लेकिन जनता इस यात्रा को अपनी समस्याओं से जोड़ रही है। ‘वोट चोरी’ का आरोप विपक्ष के लिए साझा आधार बन गया है। विरोधियों की बार-बार की टिप्पणियां बताती हैं कि यात्रा का असर केवल बिहार तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंच रहा है। ‘वोटर अधिकार यात्रा’ ने बिहार की चुनावी राजनीति को एक नई ऊर्जा दी है। यह यात्रा मतदाता सूची से शुरू हुई थी, लेकिन अब बेरोज़गारी, शिक्षा, उद्योग, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को भी अपने साथ समेट चुकी है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की संयुक्त मौजूदगी महागठबंधन को एकजुट दिखाने का प्रयास है। कांग्रेस के लिए यह सांगठनिक पुनर्जीवन का मौका है, जबकि राजद के लिए सत्ता की आकांक्षा को मूर्त रूप देने का।

    चुनावी लाभ कितना मिलेगा, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस यात्रा ने गांवों गलियों और चौपालों में ‘वोट के अधिकार’ की बहस को जीवित कर दिया है। लोकतंत्र की असली धड़कन यही है कि जनता अपनी आवाज़ सीधे राजनीतिक मंच तक पहुंचा सके। कुल मिलाकर, यह यात्रा महागठबंधन के लिए मनोवैज्ञानिक बल, कांग्रेस के लिए राजनीतिक पुनर्जीवन और बिहार की जनता के लिए अपनी आवाज़ को बुलंद करने का अवसर बन गई है। यही वह नई दिशा है जो बिहार की राजनीति को आने वाले चुनावों में प्रभावित करेगी।

    क्या वोटर अधिकार यात्रा बिहार में कांग्रेस के लिए करेगी संजीवनी का काम ?
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Article“संस्कृत : परंपरा से प्रौद्योगिकी की ओर”
    Next Article उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, जामताड़ा रवि आनंद की अध्यक्षता में जिला पुस्तकालय अनुश्रव समिति की आहूत बैठक संपन्न

    Related Posts

    2 करोड़ की चारदीवारी बरसात में ढही, यूसील कॉलोनी की सुरक्षा पर संकट, घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार के आरोप तेज

    April 27, 2026

    भीषण गर्मी में यूसील अस्पताल की बदहाली उजागर, एसी-कूलर खराब, दवा संकट और डॉक्टरों की भारी कमी से मरीज बेहाल

    April 27, 2026

    NIT जमशेदपुर में M.Des प्रवेश प्रक्रिया शुरू: CEED के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर मौका, IIT बॉम्बे से समझौते से बढ़ी गुणवत्ता

    April 27, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    2 करोड़ की चारदीवारी बरसात में ढही, यूसील कॉलोनी की सुरक्षा पर संकट, घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार के आरोप तेज

    भीषण गर्मी में यूसील अस्पताल की बदहाली उजागर, एसी-कूलर खराब, दवा संकट और डॉक्टरों की भारी कमी से मरीज बेहाल

    NIT जमशेदपुर में M.Des प्रवेश प्रक्रिया शुरू: CEED के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर मौका, IIT बॉम्बे से समझौते से बढ़ी गुणवत्ता

    करीम सिटी कॉलेज में पीजी शुरू करने की तैयारी तेज, अर्थशास्त्र व इतिहास विभाग का हुआ निरीक्षण

    स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर सख्ती, जिले में स्कूल बसों की जांच तेज, नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

    मिस इंडिया 2026 श्रेया अधरजी ने अर्जुन मुंडा से की मुलाकात, गोल्ड मेडल जीतकर बढ़ाया झारखंड का मान

    महोबा बीजेपी जिलाध्यक्ष पर पद के बदले ‘शारीरिक संबंध’ का आरोप | राष्ट्र संवाद

    छात्रों का आत्मघात: सपनों का बोझ या सिस्टम की नाकामी | राष्ट्र संवाद

    विश्व इच्छा दिवस 2026: आशा और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव | राष्ट्र संवाद

    हारे का सहारा: खाटूश्याम और सालासर बालाजी दर्शन | राष्ट्र संवाद

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.