बिरसानगर थाना पर बदनामी का दाग, थानेदार बने साजिशों के शिकार, जनता झेल रही है दर्द
जनता ने पूछा- एसएसपी साहब! हमेशा यह दाग बिरसानगर थाना पर ही क्यों?
क्या विधायक-सांसद के दबाव में काम करेंगे थानेदार?
देवानंद सिंह
जमशेदपुर, 25 अगस्त: एशिया की सबसे बड़ी बस्ती बिरसानगर का थाना वर्षों से बदनामी के दाग से जूझ रहा है। यहां जिस भी थाना प्रभारी ने कार्यभार संभाला, वह आरोप-प्रत्यारोप के भंवर में फंसकर या तो समय से पहले ही निलंबित हो गया या फिर तबादले का शिकार बन बैठा। नतीजतन, सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है इलाके की आम जनता को।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिलसिला थाना प्रभारी एन.के. दास से शुरू हुआ और इसके बाद भूषण कुमार, उपेंद्र नारायण सिंह, प्रभात कुमार, विवेक पंडित और अब अमित चौधरी तक जारी रहा। हर बार कहानी लगभग एक जैसी रही, जैसे ही कोई थानेदार अवैध कारोबार, भूमि माफिया या शराब माफिया पर नकेल कसने की कोशिश करता, उसके खिलाफ अचानक आरोपों की झड़ी लग जाती और परिणामस्वरूप कार्रवाई उसी पर होती।

जनता का स्पष्ट आरोप है कि इस पूरे खेल के पीछे वही अवैध कारोबारी हैं, जिनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाते हैं। वे साजिश रचकर ईमानदार अधिकारियों की छवि खराब कर देते हैं और अपनी पैठ मजबूत बनाए रखते हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस बदनामी और साजिशों का दंश आम लोग झेल रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं—आखिर कब तक बिरसानगर थाना इस बदनामी का बोझ उठाता रहेगा? कब तक थानेदार माफियाओं की चालबाजियों का शिकार बनते रहेंगे?

*क्या विधायक-सांसद के दबाव में काम करेंगे थानेदार?*
स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ा सवाल यह है कि क्या थानेदार विधायक और सांसद के दबाव में काम करेंगे? क्या यह उचित है कि किसी जनप्रतिनिधि के रिश्तेदार को अवैध कारोबार करने की खुली छूट मिले? आखिर किसने उन्हें इस तरह का लाइसेंस दे दिया? और जब उस पर कार्रवाई होती है तो उल्टा थानेदार पर ही गाज क्यों गिरती है?

जनता ने सवाल किया कि एसएसपी साहब, यह केवल विभाग की बात नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता की मांग है। यदि, कोई थानेदार वास्तव में दोषी है, तो उसे निश्चित रूप से सजा मिलनी चाहिए, लेकिन आपके कार्यक्षेत्र में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

जनता की अपेक्षा है कि बिरसानगर थाना से बदनामी का दाग मिटे। इसके लिए जरूरत है कि यहां तेज-तर्रार और ईमानदार अधिकारी की नियुक्ति हो। हां, यह भी सच है कि कुछ ही दिनों बाद उसके खिलाफ भी शिकायतें दर्ज हो सकती हैं, लेकिन ऐसी साजिशों से सच को दबने नहीं दिया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब वक्त आ गया है जब इस चक्र को तोड़ा जाए, सच सामने लाया जाए और बिरसानगर थाना को उसकी खोई हुई साख वापस दिलाई जाए।

