जादूगोड़ा मिल माइंस कैंटीन निजी हाथों में जाने से मजदूरों में आक्रोश गुणवत्ता घटी, सुविधाएं कम हुईं; मजदूरों ने प्रबंधन से पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा सीयूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के जादूगोड़ा स्थित मिल माइंस कैंटीन की व्यवस्था निजी हाथों में जमुना फैमिली इंटरप्राइजेज को सौंपे जाने के बाद से मजदूरों में नाराजगी बढ़ गई है। लगभग 200 मजदूरों ने हस्ताक्षर कर यूसीआईएल प्रबंधन को पत्र सौंपते हुए कैंटीन की व्यवस्था पुनः प्रबंधन के अधीन चलाने की मांग की है।

पुरानी व्यवस्था में संतुष्ट थे मजदूर मजदूरों ने बताया कि यूसीआईएल प्रबंधन द्वारा पहले डिपार्टमेंटल कैंटीन चलाई जा रही थी, जिसकी गुणवत्ता और सुविधाएं कहीं बेहतर थीं। नाश्ते में बेहतर गुणवत्ता का सामान मिलता था। लड्डू मांगने पर दिया जाता था और खाने के साथ पापड़ भी परोसा जाता था। आशीर्वाद आटा, आशीर्वाद बेसन, सनफ्लावर तेल जैसी उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल किया जाता था।

मजदूरों का कहना है कि वे खाने की गुणवत्ता से पूरी तरह संतुष्ट थे निजी हाथों में गुणवत्ता घटी निजी ठेकेदार के अधीन आने के बाद मजदूरों के अनुसार खाने की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है। नाश्ते में दिए जाने वाले सामान की गुणवत्ता खराब हो गई है। बेसन की गुणवत्ता घटिया होने से लड्डू पसंद नहीं आ रहे। खाने के साथ पापड़ देना बंद कर दिया गया है।

मजदूरों का आरोप है कि यूसीआईएल अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से कैंटीन की व्यवस्था निजी हाथों में दी गई, जबकि खर्च यूसीआईएल का हो रहा है और गुणवत्ता पर समझौता किया जा रहा है।

अस्पताल कैंटीन का उदाहरण
मजदूरों ने सवाल उठाया कि जब यूसीआईएल प्रबंधन अपने अस्पताल की कैंटीन की व्यवस्था स्वयं देखरेख में चला सकता है, तो मिल कैंटीन क्यों नहीं? मजदूरों ने यह भी बताया कि अस्पताल कैंटीन में कार्यरत 11 निजी मजदूरों को हटा दिया गया है, जिससे असंतोष और बढ़ गया है।

संयुक्त यूनियन की चेतावनी
संयुक्त यूनियन ने भी कैंटीन की चरमराती व्यवस्था को लेकर डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी, श्रम आयुक्त और यूसीआईएल सीएमडी को पत्र लिखकर गुणवत्ता सुधारने और कैंटीन की व्यवस्था वापस प्रबंधन के अधीन लाने की मांग की है। मजदूरों का कहना है कि पुरानी कैंटीन व्यवस्था से वे खुश थे, लेकिन निजी हाथों में सौंपे जाने से वे अब बेहद असंतुष्ट और नाराज हैं।


