यूसील सीएमडी पर महिला अधिकारी ने लगाया उत्पीड़न का आरोप कोर्ट ने केस डायरी तलब की, अगली सुनवाई को लेकर यूसिल में बढ़ी बेचैनी
राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता
जादूगोड़ा।यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीएल) के सीएमडी संतोष कुमार सतपति एक गंभीर कानूनी संकट में फंसते नजर आ रहे हैं। यूसीएल की डिप्टी सुपरिंटेंडेंट रैंक की महिला अधिकारी द्वारा 31 जुलाई को जादूगोड़ा थाना में उनके विरुद्ध यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया गया। मामला दर्ज होते ही यूसिल के विभिन्न विभागों में हलचल मच गई है। जादूगोड़ा से लेकर तुमलापल्ली और मुंबई तक इस प्रकरण को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

बुधवार को सीएमडी की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने केस डायरी की मांग करते हुए अगली सुनवाई के लिए तारीख निर्धारित कर दी। अभी तक सीएमडी को न तो जमानत मिली है और न ही याचिका खारिज हुई है, जिससे यूसिल कर्मियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अगली सुनवाई को लेकर सभी की निगाहें कोर्ट पर टिकी हुई हैं।

कामकाज और छवि पर भी उठे सवाल
सीएमडी पर यह आरोप ऐसे समय में आया है जब उनके कार्यकाल को लेकर पहले से ही असंतोष की स्थिति बनी हुई थी। यूसिल के वरिष्ठ अधिकारी श्रीधर बाबू ने भी उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा जा रहा है कि उनके कार्यकाल में कोई नया प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो सका है, वहीं पदोन्नति से जुड़े मामलों में भी पारदर्शिता की कमी के आरोप लगते रहे हैं। इससे उनकी कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं

पीड़िता को मिल रही धमकियां, बढ़ी सुरक्षा की मांग
पीड़िता के समर्थकों का कहना है कि महिला अधिकारी को लगातार धमकियां मिल रही हैं ताकि वह केस वापस ले ले। उन्होंने इस संबंध में डीएआई (DAI) से भी शिकायत की है। आरोप है कि उसे ड्यूटी के दौरान परेशान किया जा रहा है — मोबाइल लेकर आने पर रोक, बार-बार तलाशी और मानसिक उत्पीड़न जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। यही नहीं, जो अधिकारी महिला अधिकारी का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें भी तबादले की धमकी दी जा रही है। इससे यूसिल का आंतरिक माहौल और भी तनावपूर्ण होता जा रहा है। पीड़िता को सुरक्षा मुहैया कराने और निष्पक्ष जांच की मांग भी की जा रही है

सीएमडी को पद से हटाने की उठी मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यूसिल के कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों की ओर से मांग उठने लगी है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सीएमडी को पद से हटाकर किसी अन्य अधिकारी को प्रभार दिया जाए। इससे निष्पक्ष जांच संभव हो सकेगी और पीड़िता को भी न्याय मिल सकेगा।

यह मामला हाई प्रोफाइल बन चुका है और झारखंड के प्रशासनिक हलकों में इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। सभी की नजरें अब अगली तारीख की सुनवाई पर हैं, जो इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती है। परन्तु यह मामला काफी ह हाई प्रोफाइल हो चुका है राज्य के सभी अधिकारियों की नजर इस मामले को लेकर है। लोगों की नजर अगली तारीख पर है। वहीं सूत्रों के हवाले से यह सूचना भी मिल रही की सी एम डी के समर्थक भी अपने लॉबिंग में लग चुके हे।


