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    Home »  क्या भाजपा “व्यक्ति” से ऊपर “विचार” को पुनः अपनाएगी?
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     क्या भाजपा “व्यक्ति” से ऊपर “विचार” को पुनः अपनाएगी?

    News DeskBy News DeskJuly 23, 2025No Comments2 Mins Read
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    कड़वा सच कड़वी दवा 

     

     क्या भाजपा “व्यक्ति” से ऊपर “विचार” को पुनः अपनाएगी?

    राष्ट्र संवाद नजरिया

    देश की राजनीतिक फिजा में बदलाव की आहट स्पष्ट सुनाई देने लगी है। हवा अब उस वेग से नहीं बह रही, जिससे 2014 में नरेंद्र मोदी दिल्ली की गद्दी तक पहुंचे थे। न 2019 जैसी लहर, न वैसा जनमानस का जुनून—कुछ थमा-थमा, कुछ थका-थका सा है।

     

    बीजेपी के भीतर ही अब एक हलचल दिखती है, जो नेतृत्व को लेकर है, न कि विपक्ष को लेकर। उत्तर प्रदेश जैसे महत्त्वपूर्ण राज्य में प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा का बार-बार टलना, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर असमंजस, ये सब संकेत हैं कि पार्टी के भीतर “केंद्र” अब पहले जितना स्पष्ट नहीं रहा।

     

    भाजपा का कैडर जो कभी “संघ” को आत्मा मानता था, वह अब  मोदी की महत्ता के मोहजाल में विचारधारा से विमुख होता दिख रहा है। सरसंघचालक तक को अब आलोचना झेलनी पड़ रही है यह सामान्य नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति में गहरे बदलाव का सूचक है। जब एक व्यक्ति विचारधारा से बड़ा हो जाए, तो यह पार्टी नहीं, संप्रदाय में बदल जाती है। यही इंदिरा गांधी के समय कांग्रेस ने भुगता और अब भाजपा उसी ढलान पर खड़ी जान पड़ती है।

     

    “इस बार नड्डा जैसा यस मैन नहीं चलेगा…” यह फुसफुसाहटें अब बंद कमरों से निकलकर गलियारों में गूंजने लगी हैं। इसका अर्थ है, पार्टी के भीतर एक ऐसा तबका सक्रिय है जो पोस्ट-मोदी युग की तैयारी में है। दूसरी ओर, सत्ता के वर्तमान लाभों से जुड़े लोग अपनी पकड़ बनाये रखने को व्याकुल हैं।

    क्या भाजपा फिर से संगठन की ओर लौटेगी?

    इसका उत्तर आगामी कुछ महीनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल संकेत यही हैं कि भाजपा अब एक नए संधिकाल में प्रवेश कर चुकी है, जहां सत्ता की धुरी “व्यक्ति” से हटकर संस्थागत मूल्यों की ओर लौटे या पूरी तरह व्यक्तिवाद में ढल जाए—यह तय होना बाकी है।

     

    इतिहास ने दिखाया है कि जब-जब “व्यक्ति” विचार पर हावी हुआ, संगठन बिखर गए। भाजपा के पास अब भी समय है कि वह “मोदी के बाद” की राजनीति को दिशा दे—विचार से, संस्था से, न कि सिर्फ चेहरे से।

     

    क्या भाजपा "व्यक्ति" से ऊपर "विचार" को पुनः अपनाएगी?
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