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    Home » चापड़ी-केंदाडीह एवं राखा कॉपर माइंस खुलवाने मंत्री से मिले सांसद विद्युत महतो
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    चापड़ी-केंदाडीह एवं राखा कॉपर माइंस खुलवाने मंत्री से मिले सांसद विद्युत महतो

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 1, 2024No Comments4 Mins Read
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    चापड़ी-केंदाडीह एवं राखा कॉपर माइंस खुलवाने मंत्री से मिले सांसद विद्युत महतो

    *मुसाबनी ग्रुप ऑफ़ माइंस खुलने से मिलेगा रोजगार, क्षेत्र में आएगी खुशहाली

    घाटशिला l संवाददाता
    हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की सुरदा माइंस को शुरू कराने के लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस-वन और एनवायरमेंट क्लियरेंस की स्वीकृति वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से दिलाने के बाद सांसद विद्युतवरण महतो अब राखाकॉपर, चापड़ी और केंदाडीह माइंस को चालू कराने की मुहिम में जुट गए है। सांसद ने गुरुवार को केन्द्रीय खान मंत्री जी किशन रेड्डी से मुलाकात कर उपरोक्त कॉपर खदानों को जल्द चालू कराने की दिशा में ठोस पहल करने की मांग किया।
    सांसद ने कहा कि जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र अंतर्गत मुसाबनी प्रखंड क्षेत्र में एचसीएल की राखाकॉपर माइंस स्थित है जो वर्ष 2001 से ही बंद है। मेरे (सांसद) अथक प्रयास से वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राखाकॉपर के साथ ही नई प्रस्तावित चापड़ी माइंस को भी चालू करने के लिए भूमिपूजन किया था। उम्मीद थी कि बंद कॉपर खदानों के चालू होने से हजारों लोगों को रोजगार मिल सकेगा। हालांकि प्रबंधन की नीतियों के कारण राखाकॉपर और चापड़ी माइंस आज तक चालू नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि राखाकॉपर के साथ चापड़ी माइंस शुरू होने से एचसीएल देश में कॉपर की घरेलु जरूरत को काफी हद तक पूरा कर सकेगा जिससे भारत कॉपर के क्षेत्र में स्वावलंबी हो सकेगा। कंपनी की वित्तीय स्थिति भी सुदृढ़ होगी एवं स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में रोजगार का भी सृजन होगा। रोजगार के सृजन से क्षेत्र में खुशहाली का माहौल उत्पन्न हो होगा। सांसद ने राखाकॉपर माइंस से जुड़े सभी तकनीकी समस्याओं को जल्द दूर कराने पर जोर दिया जिससे राखाकॉपर व चापड़ी माइंस जल्द ही शुरू हो सकें।

     

    सांसद ने केंदाडीह माइंस की ओर भी ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि एचसीएल की बंद केंदाडीह माइंस को उन्होंने अथक प्रयास से दोबारा चालू कराया था। हालांकि उक्त माइंस एकबार फिर विविध तकनीकी कारणों से बंद है जिसे दोबारा शुरू कराए जाने की जरूरत है। माइंस बंद होने से सैकड़ों स्थानीय मजदूर बेरोजगार हो गए है। जाहिर है कि माइंस के पुनः चालू होने से बेरोजगार मजदूरों को फिर रोजगार मिल सकेगा। सांसद ने केंद्रीय खान मंत्री से कहा कि एचसीएल की ताम्र खदानों को यथाशीघ्र शुरू कराना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि कॉपर खदानों को छोड़कर क्षेत्र में रोजगार का कोई अन्य विकल्प नहीं है। इस दौरान सांसद प्रतिनिधि दिनेश साव, भाजपा के जिला महामंत्री हराधन सिंह, सुशील शर्मा भी उपस्थित थे।

    सांसद विद्युतवरण महतो ने केंद्रीय खान मंत्री से मुसाबनी प्रखण्ड क्षेत्र स्थित एचसीएल की धोबनी, किशनगढ़िया और पाथरगोड़ा माइंस को भी नए सिरे से चालू करने की मांग किया है। सांसद ने कहा कि तीनों खदानों में कॉपर के साथ अन्य बहुमूल्य धातु भी विद्यमान है। ये तीनों खदान लंबे समय से बंद है जिसे नए सिरे से चालू कराने की जरूरत है। सांसद ने कहा कि तीनों खदानों के चालू होने से भारत कॉपर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेगा तथा देश की आर्थिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। वहीं, ताम्र खदानों के चालू होने से हजारों की संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा क्षेत्र का भी विकास संभव हो सकेगा।

    सांसद विद्युतवरण महतो ने केंद्रीय खान मंत्री जी किशन रेड्डी से मऊभण्डार स्थित स्मेल्टर प्लांट को चालू कराने की मांग किया है। इस दौरान सांसद ने केन्द्रीय मंत्री के समक्ष प्लांट को लेकर अपना सुझाव भी रखा। सांसद ने कहा कि एचसीएल ने मऊभंडार में प्लांट को दिसंबर 2019 से बंद रखा है। प्लांट बंद होने से हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए है जिससे क्षेत्र का माहौल भी खराब हो रहा है। उन्होंने कहा कि मऊभंडार प्लांट का मॉर्डनाइजेशन कर और कॉपर अयस्क की उपलब्धता को सुनिश्चित कर दोबारा चालू किया जा सकता है। सांसद ने खान मंत्री के समक्ष सुझाव रखा कि सुरदा और केंदाडीह माइंस के शुरू होने के साथ ही राखाकॉपर व चापड़ी माइंस तथा मऊभण्डार प्लांट को एक साथ शुरू कराने की पहल की जाएं ताकि राखाकॉपर खदान को विकसित करने के दौरान ही मऊभण्डार प्लांट को चालू करने की स्थिति में लाया जा सकें। सांसद ने कहा कि सुरदा, केंदाडीह एवं राखाकॉपर माइंस के चालू होने के बाद प्लांट को चालू करने की रणनीति बनाने से समय काफी ज्यादा लगेगा जिससे मऊभण्डार पूरी तरह वीरान हो जाएगा। ऐसे में जरूरी है कि राखाकॉपर माइंस को डेवलप करने के दौरान ही मऊभण्डार प्लांट को भी मॉर्डनाइज कर चालू करने योग्य बनाया जाएं। ऐसा करने से समय कम लगेगा और सभी कॉपर खदानों के चालू होने के साथ ही मऊभण्डार प्लांट भी चालू हो जाएगा। प्लांट के चालू होने से बड़ी संख्या में स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिल सकेगा और क्षेत्र में भी खुशहाली देखने मिल सकेगा।

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