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    Home » सिख धर्म के जन्म दाता व गुरु गोविंद सिंह जी का जीवनी
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    सिख धर्म के जन्म दाता व गुरु गोविंद सिंह जी का जीवनी

    Devanand SinghBy Devanand SinghDecember 23, 2023No Comments5 Mins Read
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    गुरु गोविंद सिंह जी
    सिख धर्म के जन्म दाता और आपे गुरु आपे चेला
    श्री कलगीवाले दशम पिता परमेस्वर श्री गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म बिहार की राजधानी पटना में सन् 1666 में पौष को सत्मी के दिन हुआ था. जब धौला दाई ने गोविंद जी का जन्म कराया तो एक विशेष प्रकार की रोशनी से पूरा इलाका जंगमगा ऊठा था. तभी ज्ञानीयों ने भविष्यवाणी कर दी थी कि जग में वह अपतारीत हो चुका है. जो इस देश को अत्याचार और परेशानियों से बचा कर अंधकार से प्रकाश में लाएगा और श्री गुरु गोविंद सिंह ने अपने जीवन में किया भी वहीं. सबसे पहले गुरु गोविंद ने सभी के अंदर एकता भरी और कमजोरो में हिम्मत भरी और साहस कुट कुट कर भरा और अपनी रक्षा और अपने परिवार की रक्षा करने के अनेकों अनेक गुण सिखाए, उसके बाद 1699 में गुरु जी ने सिखों को जन्म दिया ये जन्म किसी के पेट से नहीं दिया, बल्की उस समय के हिम्मतदार हिन्दुओं में जो लोग बाहुबली थे, जो लोग दुसरो पर अत्याचार होता नहीं देख सकते थे. जो लोग कमजोर और गरीबो की रक्षा करना जानते थे और समाज की कुरीतियों को दूर रखने में अपना मान सम्मान समझते थे. और समाज का विकास और लोगों का भला करना अपना धर्म समझते थे.

     

     

    ऐसे लोगों को गुरु गोविंद सिंह जी ने आनन्दपुर में बैशाखी के दिन बुलाया और कहा है कि किसी में इतनी हिम्मत जो अपने गुरु को अपना शीश भेट कर सके तब महान जिगरे वालों में से दया सिंह उठा और गुरु गोविंद सिंह जी और उनकी चमचमाती हुई तलवार के आगे आ कर कहा गुरु गोविंद राय जी को मेरा शीश आपके चरणों में हाजिर है. इसे मंजूर करें में अब आपकी सरण में आ गया हूं उसके बाद गुरु जी दयाराम को समीयाने के अंदर ले जा कर बैठा दिया और खुन से भरी तलवार बाहर ले कर आए और जोर से आवाज लगा कर कहा है कोई और जो अपना सर मुझे दे सके तब संगत में बाहूबली की कमी नहीं थी. और दूसरी बार उठे धर्म जी जिसने कहा गुरु जी ये पुरा जीवन ही मैंने आपके नाम कर दिया है और आप को तो सिर्फ मेरा सर ही चाहिए में अपना शीश आपको भेंट स्वरूप देता हूं आप मेरा सर मंजूर करे गुरुजी धर्म जी को लेकर अंदर गए और फिर खुन से भरी तलवार ले कर वापस आए और कहा मुझे अभी अपने लिए और शीश चाहिए क्या कोई और दानी है. जो मुझे अपना शीश दे सके तब मोहकम जी उठे और कहा गुरु जी में आप पर वारी वारी जाउ मेरा सर आप मंजूर करे तब गुरु जी के सामने हिम्मत जी खड़े हुए और कहा गुरु जी इस संगत में हिम्मतदारों की कमी नहीं है. आप जितने शीश मांगोगे आप को मिलेंगे और पांचवें नम्बर पर अपना शीश देने उठे साहिब जी और गुरु जी उन्हें समयाने में ले गये और सुंदर रूप से सजा कर सिर पर पगड़ी हाथ में तलवार और केशो के साथ हाथ में कड़ा और पहने के लिए कहा इनका कारण था पगड़ी जो सिखी की निशानी रहेगी और सर के केश खुले नहीं रहेंगे और लड़ाई के समय सर पर चोट नहीं लगेगो जो अब हिन्दू हेलमेट पहनते हैं गुरु जी ने तीन सौ साल पहले इसका अविष्कार कर दिया था. तलवार का मतलब था की अत्याचारों को रोकना और दुश्मनों से अपनी और दूसरों की रक्षा करना. कड़ा का मतलब था की कभी हार नहीं माननी और कछड़ा इसलिये की. हर सिख लगोर का पक्का होगा पर स्त्री पर बुरी नजर नहीं डालेगा. और इन पांचों का नाम गुरु जी ने बदल कर भाई दया सिंह जी, भाई धर्म सिंह जी, भाई मोहकम सिंह जी, भाई हिम्मत सिंह जी और भाई साहिब सिंह रखा और इन लोगों को संगत के सामने ले कर आए और संगत के सामने गुरु जी ने खंडे बाटे में अमृत तैयार किया और पांच पियोरे को अमृत पिलाकर सिख धर्म की स्थापना की. और इन पांच पियारों से गुरु गोविंद राय ने कहा पांच पियारो मुझे भी अमृत पिला कर सिखी में शामिल करो इस बात पर भाई दया सिंहजी ने कहा गुरुजी आपने हमें सिखी दी और उसके बदले में आपने हम से शीश लिए .

     

     

     

    इस सिखी के लिये तब भाई जी ने कहा गुरु जी एक आम आदमी भी एक सर दें और गुरु भी एक सिर दे ये तो कोई इंसाफ नहीं हुआ आप तो गुरु है और आप को तो कुछ अधिक देना चाहिए तब गुरु गोविंद सिंह जी ने कहा दान तो मैं दे ना सकू भेटा मंजूर करो अगर सिख्खी पर कोई परेशानी आई तो में अपना सरवंश वार दूंगा ये बात सुन कर दया सिंह जी और पांच पियारे और संगत में बैठे सभी संगत दंग रह गया और भाई दया सिंह जी की अनुगाई में गुरु गोविंद राय को अमृत पिला कर गुरु गोविंद सिंह जी की मानक उपाधि से सम्मानित किया गया उसी वक्त से गुरु जी ने आपे गुरु आपे चेला वाली रश्म चलाई और सभी को एक धागे में पिरोया और सभी संगत को पंगत में बैठ कर लंगर चलाया जो गुरु नानक देव जी पांच सौ साल पहले कर गये थे और तभी से सिख धर्म सभी की रक्षा करता आ रहा है. हमारे सिख धर्म में इस देश की आबादी की लड़ाई में शहीदों की गिनती बहुत अधिक हैं प्रतिशत के हिसाब से जोड़ा जाए तो 79 प्रतिशत हैं | गुरु गोविंद सिंह जी ने शेरो को नहीं बब्बर शेरों को जन्म दिया था आज भी सिख कौमे शेरों की तरह धरती पर राज कर रही है. चाहे वो कारोबार के क्षेत्र में हो पढ़ाई लिखाई के क्षेत्र में राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री हो देश या विदेश में हर सिख गुरु के बताए रास्ते पर चल कर शोहरत मान सम्मान से जी रहा है|

    दास गुरुमत प्रचारक
    खालसा इंटर कॉलेज के प्रबंधक मेम्बर
    CESAR के LIFE मेम्बर
    पूर्वांचल ज्योतिषी के महामंत्री राज्यधानी से
    मो० नं० :- 9334628066

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