जब शायर हिम्मत करेगा, तभी बड़ा बनेगाः प्रो. सैयद ऐनुल हसन
नई दिल्ली, 16 जून, शुक्रवार।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता आसिफ आज़मी की पुस्तक ‘उर्दू शायरी का मुआसिर मंज़रनामा’ का लोकार्पण आईजीएनसीए के अध्यक्ष श्री रामबहादुर राय और मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने किया। इस अवसर पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रो. खालिद महमूद व प्रो. अख्तरुल वासे, दूरदर्शन की प्रसिद्ध न्यूज रीडर सलमा सुल्तान, लेखिका रमा पांडेय, माटी संस्था के संयोजक व लेखक आसिफ आज़मी तथा आईडीईए संस्था के धर्मेंद्र प्रकाश भी मौजूद थे। इस पुस्तक में पिछले चार दशकों की उर्दू शायरी की समालोचना प्रस्तुत की गई है। पुस्तक में चार दशकों की शायरी के चार दौर की चर्चा की गई है। साथ ही, शायरों और संस्थानों की सूची भी दी गई है।
मुख्य अतिथि मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने कहा कि साहिर लुधियानवी ने ‘किसी पत्थर की मूरत से मुहब्बत का इरादा है, परस्तिश की तमन्ना है इबादत का इरादा है’ जैसा गीत आज लिखा होता, तो फिल्म प्रतिबंधित हो जाती, गाना प्रतिबंधित हो जाता। उन्होंने कहा कि जब शायर हिम्मत करेगा, तभी बड़ा बनेगा। शायर सामने आएगा, तभी शेर सामने आएगा। उन्होंने कई अशआरों के जरिये उर्दू शायरी की खूबसूरती पर शानदार तरीके से बात की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने कहा कि ये किताब हिन्दी में भी आएगी, तो हिन्दी और उर्दू के बीच संवाद बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में आकांक्षा भी है और प्रेरणा भी। आकांक्षा भविष्य की होती है और प्रेरणा अतीत से मिलती है। पुस्तक के लेखक आसिफ आज़मी ने कहा कि वही शायरी बची रहती है, जो लोगों से कनेक्ट करती है।
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