बीहट। राष्ट्रकवि दिनकर स्मृति विकास समिति, सिमरिया के द्वारा आयोजित 118वें दिनकर जयंती समारोह के 10वें दिन मंगलवार को सिमरिया के विभिन्न नुक्कड़ों पर सभा कर 23-24 सितंबर के कार्यक्रम की जानकारी दी गई।
दिनकर जयंती समारोह का विस्तृत कार्यक्रम
इस अवसर पर समिति के संयुक्त सचिव विनोद बिहारी ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि 23 सितंबर को दिनकर जयंती के दिन सुबह 10:00 बजे दिनकर आवास और पंचायत भवन स्थित राष्ट्रकवि दिनकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाएगा। इसके बाद सुबह 11:30 बजे से दिनकर पुस्तकालय स्थित दिनकर स्मृति सभागार में मुख्य जयंती समारोह का आयोजन होगा, जिसमें कला-संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, पथ निर्माण मंत्री इं. शैलेंद्र कुमार, विधान पार्षद सर्वेश कुमार, स्थानीय विधायक रजनीश कुमार, बेगूसराय नगर विधायक कुंदन कुमार अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
दूसरे दिन सांस्कृतिक एवं साहित्यिक आयोजन
वहीं 24 सितंबर दिन गुरुवार को दिनकर पुस्तकालय, सिमरिया के दिनकर स्मृति सभागार में दोपहर 12 बजे से दिनकर की कविताओं पर आधारित नाट्य मंचन अंतरराष्ट्रीय रंग निर्देशक श्री प्रणब मुखर्जी के निर्देशन में सनबीम स्कूल, वाराणसी के कलाकारों के द्वारा होगा। दोपहर 01 बजे से ‘दिनकर और हमारा समय‘ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित है। इसमें वक्ता के रूप में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रो. कमलानंद झा, प्रख्यात लेखक श्री अभय कुमार ठाकुर, जामिया मिलिया, दिल्ली के प्रो. सरवरूल हुदा, प्रो. कमलेश कुमार शामिल होंगे।
इसी अवसर पर स्मारिका ‘समर शेष है… 14‘ का विमोचन एवं दिनकर सृजनात्मक प्रतियोगिता-2026 के विजेताओं को पुरस्कार वितरण होगा। संध्या 05 बजे से विराट कवि सम्मेलन का आयोजन दिनकर आवास, सिमरिया में होगा।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की विरासत और सिमरिया का महत्व
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर हिंदी साहित्य के युगपुरुष माने जाते हैं। उनकी रचनाओं में ‘रश्मिरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’, ‘उर्वशी’ और ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ कालजयी हैं। दिनकर जी का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गांव में हुआ था। उनकी जन्मस्थली सिमरिया आज एक साहित्यिक तीर्थस्थल के रूप में विकसित हो चुकी है। यहां स्थित दिनकर आवास और दिनकर पुस्तकालय उनकी स्मृतियों को संजोए हुए हैं। हर वर्ष उनकी जयंती पर आयोजित होने वाला दिनकर जयंती समारोह साहित्य प्रेमियों, शोधकर्ताओं और आम जनमानस के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है।
इस वर्ष का आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें नई पीढ़ी को दिनकर के साहित्य से जोड़ने के लिए दिनकर सृजनात्मक प्रतियोगिता आयोजित की गई है। इसके विजेताओं को पुरस्कृत कर साहित्य के प्रति रुचि जगाने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय ‘दिनकर और हमारा समय’ समसामयिक परिस्थितियों में दिनकर की प्रासंगिकता को रेखांकित करेगा। अंतरराष्ट्रीय रंग निर्देशक प्रणब मुखर्जी द्वारा निर्देशित नाट्य मंचन दिनकर की कविताओं को दृश्यात्मक रूप देगा, जो दर्शकों के लिए एक अनूठा अनुभव होगा।
नुक्कड़ सभा में समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष रामनाथ सिंह, पुस्तकालय अध्यक्ष विश्वम्भर सिंह, शिक्षक जितेंद्र झा, अमरदीप सुमन, प्रियव्रत कुमार, राधे कुमार, संजीव फिरोज आदि मौजूद थे। इन सभी की उपस्थिति आयोजन की भव्यता और जनभागीदारी को दर्शाती है।
बिहार सरकार के मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के प्रति गंभीर है। कला-संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार और पथ निर्माण मंत्री इं. शैलेंद्र कुमार की उपस्थिति से आयोजन को राजकीय गरिमा प्राप्त होगी। स्थानीय विधायकों की सक्रिय भागीदारी क्षेत्र के विकास में साहित्यिक धरोहरों के योगदान को रेखांकित करती है।
अधिक जानकारी के लिए आप रामधारी सिंह दिनकर के विकिपीडिया पृष्ठ पर जा सकते हैं।

