राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर: मिथिला सांस्कृतिक परिषद, जमशेदपुर द्वारा आयोजित द्वि-दिवसीय विद्यापति स्मृति पर्व का समापन रविवार को सफलतापूर्वक हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत महाकवि विद्यापति रचित भगवती वंदना “जय-जय भैरवी” की प्रस्तुति से हुई, जिसे शंकर नाथ झा ने प्रस्तुत किया। इसके बाद स्निग्धा झा ने विद्यापति के गीतों की प्रस्तुति दी और भगवती गीत पर आधारित सामूहिक भाव नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पंडित विपिन झा द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया तथा मंच पर उपस्थित अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय, पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता, मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता, विजय खां, आनंद बिहारी दुबे, रविंद्र झा नट्टू तथा बैंक ऑफ इंडिया के जोनल डायरेक्टर पंकज कुमार मिश्र को परिषद की ओर से मिथिलांचल की परंपरागत पाग, शॉल और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया।
महासचिव धर्मेश कुमार झा ने अतिथियों और उपस्थित जनसमूह का स्वागत किया, जबकि अध्यक्ष मोहन ठाकुर ने अध्यक्षीय भाषण प्रस्तुत किया। इस दौरान परिषद की ओर से मैथिली भाषा को नियोजन नीति में शामिल करने, झारखंड में मैथिली अकादमी की स्थापना तथा मिथिला समाज के विभिन्न उपनामों को सरकारी गजट में प्रकाशित करने की मांग रखी गई। मंत्री दीपिका पांडेय और पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने इन मांगों को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम के दौरान परिषद की पहल पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को “मिथिला गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया। इसमें शिक्षा, चिकित्सा, समाजसेवा और अन्य क्षेत्रों में योगदान देने वाले अरुण कुमार, सरोज कुमार झा, दीपक कुमार झा, प्रमोद सिंह, कौशलेंद्र दास, शिशिर मिश्रा, डॉ. अजय झा, डॉ. नकुल चौधरी, डॉ. ए.एन. झा और समाजसेवी विजय शंकर मिश्रा को सम्मानित किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों के साथ मिथिला की प्रसिद्ध गायिका जूली झा, कुंज बिहारी मिश्र और विकास झा ने भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को आकर्षक बनाया। मंच संचालन अशोक कुमार झा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रंजीत कुमार झा ने किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में परिषद के अध्यक्ष मोहन ठाकुर, महासचिव धर्मेश कुमार झा, कोषाध्यक्ष रंजीत झा सहित कई पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों और स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

