भोपाल: मध्यप्रदेश में पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा भाजपा का दामन थामने के बाद प्रदेश में सियासी भूचाल तो आ ही गया, साथ ही भाजपा की सरकार बनने की संभावनाएं भी प्रबल हो गई. वही मुख्यमंत्री पद के लिए एक नहीं बल्कि तीन दावेदार सक्रिय हो गए है, जिसमें केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्रसिंह तोमर, पूर्व सीएम शिवराजसिंह चौहान व पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा है. यहां तक कि नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने तो भोपाल प्रदेश भाजपा कार्यालय के सामने नारेबाजी तक की है. अब देखना यह है कि भाजपा के शीर्ष नेता क्या करते है.
बताया जाता है कि कमलनाथ सरकार पर गहराए संकट के बाद से ही नई सरकार के गठन की सुगबुगाहट भी हो गई है, चर्चा है कि जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अब तक सभी मोर्चों में आगे किया हुआ है, उसी तरह सरकार बनने पर प्रदेश की कमान भी उन्हें सौंपी जा सकती है. चौहान को सीएम की दावेदारी में पहले स्थान पर रखने वालों का दावा है कि प्रदेश में बड़ी तादाद में उपचुनाव होना हैं, ऐसी परिस्थिति में चौहान ही उपचुनाव में विजय दिलवा सकते हैं. एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि मोदी सरकार में लंबे समय से केंद्रीय मंत्री की बागडोर संभाल रहे नरेंद्र सिंह तोमर को भी मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल सकता है. तोमर पहले भी प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं.
वे दो बार भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष की कमान संभाल चुके हैं. कार्यकर्ताओं और विधायकों से भी तोमर का गहरा नाता है. जहां आगे उपचुनाव होना है, उनमें से अधिकांश सीटें ग्वालियर, चंबल अंचल की हैं. तोमर भी इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैंए इसलिए पार्टी उन पर भी दांव लगा सकती है.
भाजपा सरकार के दौरान लंबे समय तक संकटमोचक की जिम्मेदारी निभाने वाले पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल हैं. मिश्रा पहले भी भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष और मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में शामिल रहे हैं. कुछ समय पहले तक नरोत्तम मिश्रा और शिवराज सिंह चौहान के बीच गहरे मतभेद रहे, लेकिन सरकार के लिए जोड़-तोड़ के दौरान दोनों के बीच अघोषित समझौता हो गया.