Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » पृथ्वी के पास से गुजर गया एस्टेरॉयड, बिना नुकसान टला खतरा
    Breaking News Headlines अन्तर्राष्ट्रीय राष्ट्रीय

    पृथ्वी के पास से गुजर गया एस्टेरॉयड, बिना नुकसान टला खतरा

    Devanand SinghBy Devanand SinghApril 30, 2020No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    नई दिल्ली: अब से कुछ घंटे पहले पृथ्वी के पास से एस्टेरॉयड (उल्कापिंड) गुजर गया. बिना किसी नुकसान के यह खतरा टला गया. भारतीय समयानुसार 3 बजकर 26 मिनट पर यह उल्कापिंड गुजरा और इससे पृथ्वी के किसी हिस्से को कोई नुकसान नहीं हुआ. इसकी पुष्टि दक्षिण अफ्रीका की ऑब्जर्वेटरी की ओर से की गयी.

    ऑब्जर्वेटरी की ओर से किए गए ट्वीट में बताया गया है कि यह विनाशकारी उल्कापिंडों में से एक है. इसमें एक वीडियो भी पोस्ट की गई है. हालांकि पहले भी इस बात की उम्मीद जताई गई थी कि यह बिना पृथ्वी से टकराए निकल जाएगा. अब इस तरह का अगला संयोग 2079 में होगा.

    प्राप्त जानकारी के अनुसार यह पृथ्वी से लगभग 40 लाख मील के फासले से गुजरा है. इस उल्कापिंड की खोज हवाईद्वीप समूह पर नीट नाम के प्रोग्राम के तहत हुई थी. इसकी रफ्तार 19 हजार किलोमीटर प्रति घंटा है. इसकी ताजा तस्वीर सामने आई है. ये एक ऐतिहासिक खगोलीय घटना है. इसके बाद ये क्षुद्र ग्रह 2079 में आया. तब यह पृथ्वी के सबसे करीब आ गया. इस विशाल अंतरिक्ष चट्टान का अनुमानित व्यास 1.1 से 2.5 मील (1.8 से 4.1 किलोमीटर) है, या अमेरिका के मैनहट्टन आइलैंड के बराबर चौड़ा है.

    साल 1998 OR2 नामक इस उल्कापिंड की खोज एस्टेरॉयड ट्रैकिंग प्रोग्राम के जरिए की गई थी. चपटी कक्षा वाले इस उल्कापिंड की खोज 1998 में हो गई थी. तभी से इस पर शोध जारी है.

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleलॉकडाउन में फंसे हजारों मजदूर और छात्र पहुंच सकेंगे घर, केन्द्र ने जारी की नई गाइडलाइन्स
    Next Article बेगूसराय पीला जोन में महीनों बाद बेगूसराय जिले के लोगों के मन में खुशी आई 

    Related Posts

    भरत तिवारी एनकाउंटर: बाबा बागेश्वर की एंट्री, राष्ट्रीय चर्चा में मामला

    June 24, 2026

    केतन हत्याकांड का राज खुला: बहन के शक ने किया खुलासा

    June 24, 2026

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: अवसरों को साधने की चुनौती

    June 24, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    अभी-अभी

    भरत तिवारी एनकाउंटर: बाबा बागेश्वर की एंट्री, राष्ट्रीय चर्चा में मामला

    केतन हत्याकांड का राज खुला: बहन के शक ने किया खुलासा

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: अवसरों को साधने की चुनौती

    स्मार्टफोन की लत: डिजिटल युग की वैश्विक चुनौती

    टाटा स्टील वेतन समझौता: कर्मचारियों को मिलेगा MGB लाभ

    सरायकेला-चाईबासा में हाथियों का आतंक: ईचागढ़ में महिला घायल, मनोहरपुर में दंतैल के हमले से व्यक्ति की मौत

    सरायकेला में अवैध खनन पर सख्ती, उपायुक्त ने दिए संयुक्त कार्रवाई के निर्देश

    कांड्रा पुलिस ने पांच खोया मोबाईल बरामद कर धारक को सौंपा

    दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण मिलना झारखंड के लिए गौरव की बात- केपी सोरेन 

    जेवियर स्कूल में अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस का हुआ आयोजन

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.