पीलीभीत. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में पराली जलाने के मामले में प्रशासन सलाह और सख्ती दोनों पर अमल कर रहा है. इसी के चलते जहां किसानों को पराली के सही निस्तारण के तमाम तरीके दिए जा रहे हैं तो वहीं पराली जलाने वालों किसानों से भी सख्ती से निपटा जा रहा है.
सख्ती का आलम यह है कि 5 किसानों पर एफ आई आर जुर्माना तो लगाया ही गया साथ ही उनका हैसियत और चरित्र प्रमाण पत्र भी निरस्त कर दिया गया है. इतना ही नहीं क्षेत्र के लेखपाल सचिव किसान सहायक को निलंबित कर दिया गया है . कार्रवाई यहीं नहीं रुकी, तहसीलदार और थाना इंचार्ज को भी चेतावनी दी गई है. उधर मामले में एसपी ने बीट प्रभारी कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया है और चौकी इंचार्ज की भूमिका की सीओ जांच कर रहे हैं.
पराली जलाने को लेकर पहली बार जिलाधिकारी स्तर से इस बड़ी कार्यवाही से जिले भर के किसानों में हड़कंप मच गया है. पराली पर सेटेलाइट से निगरानी रखी जा रही है. 5 किसानों पर भी कार्यवाही सैटेलाइट तस्वीरों के आने के बाद हुई है.
पराली को लेकर पूरे देश में जाड़ों का मौसम आते ही या फिर यूं कहें धान की फसल कटने के बाद बहस छिड़ जाती है. दिल्ली-एनसीआर में तो पराली जलाने से उठे धुएं से लोगों का जीना दूभर हो जाता है. लिहाजा पीलीभीत जैसे तराई के इलाके में प्रशासन वायु प्रदूषण और कृषि भूमि की उपजाऊ क्षमता दोनों को लेकर एकदम साफ एक्शन प्लान पर है.
पराली जलाओगे तो ऐसी सख्त कार्यवाही की जाएगी मुकदमा जुर्माना हैसियत ,चरित्र प्रमाणपत्र निरस्त होने के साथ-साथ तमाम सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाओगे. इतना ही नहीं कार्यवाही की गाज उन सरकारी अमले के लोगों पर भी गिरेगी जो पराली जलाने पर अनदेखी करेंगे या किसानों को सही रास्ता बताने की जहमत नहीं उठाएंगे. जिला अधिकारी की इस कार्यवाही से साफ है कि जब तहसीलदार मजिस्ट्रेट जैसे अधिकारी को पराली जलाने के मामले में कार्यवाही के दायरे में लाया जा सकता है तो रियायत की कोई गुंजाइश ही नहीं है.
पीलीभीत प्रशासन का उन बातों का जवाब देते हुए कहा कि प्रशासन किसानों के साथ है. जिसमें अक्सर कहा जाता है कि किसान पर पराली जलाने पर रिपोर्ट दर्ज हो रही है, लेकिन किसान पराली ना जलाएं तो क्या करें.
इस पूरे मामले से साफ है कि जिला अधिकारी की मंशा से सरकारी अमला किसान के कंधे से कंधा मिलाकर पराली के निस्तारण में अगर साथ दें तो पराली के जलने से होने वाला प्रदूषण से तो बचाव होगा ही साथ ही पराली एक बेहतर खाद का खाद या पशुओं का चारा बन सकेगी. बस जरूरत है तो किसान और सरकारी अमले के एक साथ खड़े होने की. समझदारी से काम लेने की तो समस्या का सीधा सीधा हल निकल आएगा.

