लेखक: राष्ट्र संवाद संवादाता
झारखंड पुलिस को बड़ी कामयाबी: नक्सल उन्मूलन में निर्णायक मोड़
रांची: झारखंड पुलिस को नक्सल उन्मूलन अभियान में एक बड़ी सफलता मिलने जा रही है।
जानकारी के अनुसार, सभी नक्सली कुछ ही देर में झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सली अपने पास मौजूद 11 अत्याधुनिक हथियार और 1500 से अधिक जिंदा गोलियां भी पुलिस के हवाले करेंगे।
पुनर्वास नीति का प्रभाव और मुख्यधारा में वापसी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर कई सक्रिय नक्सली मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की नीति के तहत पुनर्वास, रोजगार और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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झारखंड में नक्सलवाद की पृष्ठभूमि और आत्मसमर्पण का रणनीतिक महत्व
झारखंड लंबे समय से नक्सल प्रभावित राज्यों में अग्रणी रहा है। नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत पुलिस और सुरक्षा बल लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। नक्सलाइट-माओवादी विद्रोह ने राज्य के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में विकास को अवरुद्ध किया है। 16 शीर्ष नक्सलियों का एक साथ आत्मसमर्पण नक्सली संगठन के नेतृत्व ढांचे को गंभीर रूप से कमजोर करेगा। 11 अत्याधुनिक हथियार जिनमें एके-47, इंसास राइफल और एलएमजी शामिल हो सकते हैं, तथा 1500 से अधिक गोलियां जमा होने से नक्सलियों की हिंसक क्षमता में उल्लेखनीय कमी आएगी।
पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा के नेतृत्व में यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। यह कदम नई दिशा–एक नई पहल नीति की सफलता को दर्शाता है जिसे झारखंड सरकार ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को तत्काल आर्थिक सहायता, आवास, कौशल विकास प्रशिक्षण और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता जैसे प्रावधान शामिल हैं।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की राह
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सामूहिक और उच्च-स्तरीय आत्मसमर्पण से नक्सली कैडर में हतोत्साह फैलेगा और अधिक नक्सली मुख्यधारा में लौटने को प्रेरित होंगे। झारखंड पुलिस का मानना है कि यह आत्मसमर्पण अभियान राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई को और मजबूती देगा तथा प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए सरकार ने व्यापक योजना तैयार की है जिसमें मनोवैज्ञानिक परामर्श, पारिवारिक पुनर्मिलन और सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं।
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में झारखंड में नक्सली हिंसा की घटनाओं में 40 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। यह आत्मसमर्पण इस प्रवृत्ति को और तेज करेगा। झारखंड सरकार की यह पहल अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण बन सकती है।

