Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » छठ पर्व की महिमा है अपार
    Breaking News Headlines धर्म राष्ट्रीय

    छठ पर्व की महिमा है अपार

    Devanand SinghBy Devanand SinghNovember 19, 2020No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    छठ पर्व की महिमा है अपार
    छठ शायद इकलौता ऐसा पर्व है जिसमें सामाजिक तानाबाना के हर वर्ग की उपयोगिता है। प्रकृति के हर रुप का प्रयोग किया जाता है। इस पर्व की खासियत इसमें बरती जाने वाली शुद्धता है। आज कोरोना काल में जिस शुद्धता पर इतना जोर है, वह छठ व्रतधारी परिवारों के लिये आम है। केवल वह परिवार ही नहीं, बल्कि छठ के मौके पर सामान्य लोग भी अध्र्य देने के लिये नदी तालाब जाने वाले मार्ग की साफ सफाई खुद करते है। जिनका घर उस मार्ग पर पड़ता है, वह इसे सौभाग्य मानते हैं और सुबह से ही मार्ग की धुलाई में लग जाते हैं। सामाजिक सरोकार के इस महापर्व की महिमा अपार है।बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश से निकलते हुए अब यह राष्ट्रव्यापी त्योहार बन चुका है। केवल पूर्वांचल के ही नहीं, देश के दूसरे हिस्से के लोग भी उसी श्रद्धा से इस पर्व का हिस्सा बनने लगे हैं। यह ऐसा पर्व है जिसे हरकोई एक साथ एक घाट पर मनाता है। न कोई बड़ा रह जाता है, न छोटा। जात-पात की दूरी खत्म हो जाती है। छठ का प्रसाद ग्रहण करने के लिये किसी का भी हाथ किसी के आगे बढ जाता है और उसे निराश नहीं होना पड़ता। यह ऐसा पर्व है जिसमें साक्षात सूर्य की अराधना की होती है। डूबते सूर्य को पहले अध्र्य प्रदान किया जाता है। सूर्य को ग्रंथों में ऐसा प्रत्यक्ष देवता माना है जिसका हम साक्षात दर्शन कर सकते हैं। अभी कोरोना काल में सूर्य की तपिश की क्या उपयोगिता है, इसे पूरी दुनियां महसूस कर रही है। सूर्य ऊर्जा का स्रोत है और इसकी किरणों से विटामिन डी जैसे तत्व शरीर को मिलते हैं। सूर्य मौसम चक्र को चलाने वाला ग्रह है। ज्योतिष के नजरिए से सूर्य आत्मा का ग्रह माना गया है। सूर्य पूजा आत्मविश्वास जगाने के लिए की जाती है। पुराणों के नजरिए से देखें तो सूर्य को पंचदेवों में से एक माना गया है, ये पंच देव हैं ब्रह्मा, विष्णु, शिव, दुर्गा और सूर्य। किसी भी शुभ काम की शुरुआत में सूर्य की पूजा अनिवार्य रूप से की जाती है। शादी करते समय भी सूर्य की स्थिति खासतौर पर देखी जाती है। भविष्य पुराण से ब्राह्म पर्व में श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र सांब को सूर्य पूजा का महत्व बताया है। बिहार में मान्यता प्रचलित है कि पुराने समय में सीता, कुंती और द्रौपदी ने भी ये व्रत किया था।
    छठ माता यानि सूर्यदेव की बहन के लिए निर्जला व्रत किया जाता है, यानी व्रतधारी करीब 36 घंटे तक जल भी ग्रहण नहीं पीते हैं। पंचमी तिथि पर खरना होता है जिसे तन और मन का शुद्धिकरण माना जाता है। इस पर्व में जिस दौरा, सूप का उपयोग किया जाता है, उसे समाज का सबसे निचले तबका माना जाने वाला वर्ग तैयार करता है। इस त्योहार में तमाम मौसमी फसल, फल, आदि का उपयोग किया जाता है। सूप दौरा में जिन फलो, आदि को सजाया जाता है, ऐसा उदाहरण कहीं और देखने को नहीं मिलता। छठ के कर्णप्रिय गीतों से करीब एक सप्ताह तक सारा वातावरण एक तरह से शुद्ध होता रहता है। कोरोना के इस दौर में भी छठ के उत्साह में कोई कमी नही ंआई है। सरकार के गाइड लाइन के बीच लोग पूरी श्रद्धा के साथ पूजा कर रहे हैं।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleमणिपाल-टाटा मेडिकल कॉलेज में दाखिला पर रोक शीघ्र हटेगी
    Next Article समाहरणालय सभाकक्ष में उपायुक्त के अध्यक्षता में वनाधिकार अधिनियम से संबंधित बैठक संपन्न

    Related Posts

    चतरा के ‘सोनबीघा का बेटा’: संसद तक का प्रेरणादायी सफर

    June 10, 2026

    संसद की दहलीज पर सोनबीघा का बेटा: एक प्रेरणादायी सफर

    June 10, 2026

    मोदी बोले: 12 साल विश्वास, विकास और जनकल्याण

    June 9, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    अभी-अभी

    चतरा के ‘सोनबीघा का बेटा’: संसद तक का प्रेरणादायी सफर

    संसद की दहलीज पर सोनबीघा का बेटा: एक प्रेरणादायी सफर

    मोदी बोले: 12 साल विश्वास, विकास और जनकल्याण

    घटती जन्म दर: भारत की भविष्य की चेतावनी या अवसर

    FDA का बड़ा एक्शन: अवैध वाटर प्लांट सील

    जब रोज़ी-रोटी कमाने निकले हाथ: विजाग स्टील प्लांट में आठ श्रमिकों की मौत

    विश्व नेत्रदान दिवस पर जागरूकता का महत्व

    विकसित भारत संकल्प सम्मेलन में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे, ‘12 साल विश्वास के, विकास के और जन कल्याण के’ विषय पर सम्मेलन आयोजन

    24 घंटे बाद स्वर्णरेखा नदी से युवक का शव बरामद, एनडीआरएफ की टीम ने निकाला शव

    जब तक सृष्टि है तब तक बिरसा मुण्डा जी हमारे दिलों मे बसे रहेंगे- काले 

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.