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    Home » अधूरे सनसनीखेज के किस्से
    झारखंड साहित्य

    अधूरे सनसनीखेज के किस्से

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 10, 2019No Comments2 Mins Read
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    अधूरे सनसनीखेज के किस्से
    और अधूरे ख्वाब आँखों में पलते हैं पगडंडियों की संकिर्ण गलियों
    आदिवासी मूल की व्यथा गुमनाम
    से घूमते हैं जीवन का पदचाप मौनव्रत रहता

    जीवन शैली मैली अधूरी पड़ी हुई है आंखों के ख्वाब कभी हंसते कभी सच होते
    यूं ही सघर्ष जीवन पदचाप मौनव्रत रहता

    नित्य पंक्तियों में
    झिलमिलाते रहते झुंड मे
    भागदौड़ के आदिवासी
    यह मूल, कदम शहरों की
    हवाओं में रुख करते
    और सूरज ढले लौट
    आता परिंदों के झुंड में
    चादर बिछा रातों
    गुजारता जमीन में
    यूं ही जीवन पद मौनव्रत रहता

    नशे भूत महुआ पीने को मजबूर आए दिन सिंयासियो डरने को मजबूर
    जनगणना परिवार की घंटती गुफाओं की भांति बिखरती परिवार की लड़ियां
    अपमान घुटने को मजबूर
    यू कहूं जीवन पदचिन्हों से मौनव्रत रहता

    सूखे नदी ,कटाई वृक्षों की
    अपने हक हेतु पथरीली राहों पर जाती अपने जीवन की राशि हौसलों से अपनी हथियार चलाते
    जीवन का पदचाप मौनव्रत रहता

    झारखंडी नृत्य की झांकी,मनमोहक
    आदि ,वस्त्र के रूप में नागपुरी कला दिखाते
    भेड़ बकरियों मंनोरंजक उत्पादन फसलों से अपनी जीवनशैली,चलाते
    नागपुरीनृत्य से झारखंड का मान बढ़ाते

    तीरताई, कमांडो से निकलने की तो अपनी ताकत दिखाते
    सीमा पर भी अपने जोर जमाते आदिवासी मूल जीवन की मौत पटलपर
    अपने स्वर्ण अक्षरों पर नाम अक्षरित करते

    बिरसा मुंडा की धरती बलिदान बलिदान का क्षेत्र याद दिलाते
    जीवनशैली का पदचाप मौनव्रत रहता
    जंयहिद

    यूवाकवयित्रि अंकिता सिन्हा
    जमेशदपुर झारखंड

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