राष्ट्र संवाद, संवाददाता
चांडिल: चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत रांची–जमशेदपुर मुख्य मार्ग पर कांडरबेड़ा चौक के समीप मंगलवार को मोटरयान निरीक्षक द्वारा चलाए गए सघन जांच अभियान से वाहन मालिकों में हड़कंप मच गया। जांच के दौरान बिना तिरपाल ढके बालू लदे वाहनों एवं ओवरलोड गाड़ियों की विशेष रूप से जांच की गई।
मोटरयान निरीक्षक सूरज हेंब्रम ने अभियान के दौरान कई वाहनों को रोका और कागजातों की जांच की। हालांकि, फोन पर संपर्क करने का प्रयास किए जाने पर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। जांच की सूचना मिलते ही ओवरलोड बालू वाहन सड़क किनारे जहां-तहां खड़े हो गए, जिससे मार्ग पर कुछ समय के लिए अव्यवस्था की स्थिति भी उत्पन्न हो गई।
सूत्रों के अनुसार, चांडिल अनुमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में हाइवा और ट्रिप ट्रेलर के माध्यम से अवैध बालू व पत्थर का परिवहन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। बताया जाता है कि चालान कम मात्रा का होता है, जबकि लोडिंग क्षमता से कहीं अधिक की जाती है, जिससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
जानकारी के मुताबिक, ईचागढ़ और तिरुलडीह क्षेत्र के सुवर्णरेखा नदी घाट से भारी वाहन बिना वैध चालान के बालू ढोते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित थाना क्षेत्रों के पुलिस प्रशासन की कथित मेहरबानी से ये वाहन बेखौफ सड़कों पर दौड़ते हैं।
सूत्र बताते हैं कि जहां 300 सीएफटी का चालान होता है, वहीं 700 से 1300 सीएफटी तक बालू लोड कर वाहनों को चलाया जाता है। इतना ही नहीं, ओवरलोड वाहन सड़क पर चलाने के लिए कथित रूप से “एंट्री फीस” भी ली जाती है। वाहन मालिकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 500 से 600 भारी वाहन संचालित होते हैं, जिनसे आरटीओ, डीटीओ और एमवीआई स्तर पर 6 से 7 हजार रुपये तक की वसूली की बात सामने आती है। थाना पासिंग इंट्री अलग से निर्धारित दलालों के माध्यमों से या संबधित थाना के वाहन चालक सीधे तौर पर जुड़े होने की सूचना मिल रही रही है.
इस पूरे मामले में झारखंड सरकार को दोहरा राजस्व नुकसान हो रहा है। हालांकि, समय-समय पर परिवहन एवं खनन विभाग द्वारा जांच अभियान चलाया जाता है, लेकिन सवाल उठता है कि नियमों के विरुद्ध वाहनों के संचालन के पीछे किसका संरक्षण है और इस सिंडिकेट के तार आखिर कहां तक जुड़े हैं?

