सतर्कता आयोग की सिफारिश को किया नजरअंदाज!
यूरेनियम कॉरपोरेशन ने घोटालेबाज़ अधिकारी सुदीप्तो दास को मेजर पेनल्टी से बचाकर दी बड़ी राहत
राष्ट्र संवाद विशेष संवाददाता
जादूगोड़ा:यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL), जादूगोड़ा में भ्रष्टाचार के खिलाफ केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC), नई दिल्ली की सख्त अनुशंसा को दरकिनार कर घोटाले में लिप्त अधिकारी को बचाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

CVC ने दिनांक 25.06.2024 को जारी ऑफिस मेमोरेण्डम के माध्यम से UCIL के चीफ कंट्रोलर (परचेज) सुदीप्तो दास को लाखों रुपये के घोटाले में दोषी पाया और उनके खिलाफ मेजर पेनल्टी की सिफारिश की थी। लेकिन UCIL प्रबंधन ने उन्हें सिर्फ एक वेतनवृद्धि रोककर मामूली मायनर पेनल्टी देकर घोटाले के मामले को दबा दिया।

दास का मूल वेतन ₹1,23,830 से घटाकर ₹1,20,220 कर दिया गया, जबकि मेजर पेनल्टी के तहत उन्हें पदावनत कर न्यूनतम पद या सेवा से हटाया जाना चाहिए था। इस कार्रवाई से UCIL प्रबंधन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
*कहां गई पारदर्शिता?*

सिर्फ इतना ही नहीं, सुदीप्तो दास को हाल की डीपीसी (डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी) में डिप्टी जनरल मैनेजर के पद के लिए पदोन्नति की दौड़ में भी शामिल किया गया, जबकि घोटाले के दोषी अधिकारी को पदावनत किया जाना चाहिए था। यह सब कुछ CMD के नाक के नीचे हुआ, जिससे पूरे सिस्टम की साख पर सवाल उठ रहे हैं।
*सल्फ्यूरिक एसिड घोटाले का आरोपी*
परचेज विभाग में पदस्थापना के दौरान सुदीप्तो दास पर सल्फ्यूरिक एसिड घोटाले का भी गंभीर आरोप लगा था। उस समय उन्हें स्टोर विभाग में ट्रांसफर किया गया, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से बाद में फिर से परचेज विभाग में वापस लाया गया, जिससे पूरे प्रबंधन पर पक्षपात और मिलीभगत का आरोप लग रहा है।

*स्वतंत्र जांच की मांग*
सूत्रों के अनुसार, अगर इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि UCIL प्रबंधन ने सुदीप्तो दास को अनुचित लाभ पहुंचाया और CVC की सिफारिशों की धज्जियां उड़ाईं।

क्या UCIL में भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिल रहा है?
क्या केंद्रीय एजेंसियों की सिफारिशें अब सिर्फ कागज़ी औपचारिकता बनकर रह गई हैं?
अब देखने वाली बात यह होगी कि इस प्रकरण पर उच्च स्तर से कोई कड़ी कार्रवाई होती है या फिर मामला हमेशा की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा।

