यूसीआईएल में सुरोजित दास की ‘बिजली जैसी’ तरक्की पर बवाल, मजदूर संगठनों ने उठाई जांच की मांग

राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता
जादूगोड़ा:यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के अधिकारी सुरोजित दास की हैरतअंगेज़ प्रमोशन पर विवाद गहराता जा रहा है। मजदूर संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर उन्हें फास्ट ट्रैक तरक्की दी गई है। साथ ही परिजनों को नौकरी दिलाने और पद के दुरुपयोग के आरोप भी लगे हैं।

नियमों से परे प्रमोशन
जहां सामान्य कर्मचारियों को क्लर्क से प्रबंधकीय स्तर तक पहुंचने में 15–20 साल लग जाते हैं, वहीं दास को अब तक ग्यारह प्रमोशन मिल चुके हैं। फिलहाल वे अतिरिक्त प्रबंधक (एडिसनल मैनेजर) के साथ-साथ सीएमडी के निजी सहायक (पीए) भी हैं। मजदूर संगठन इसे “चमत्कार नहीं, बल्कि पहुंच और प्रभाव का खेल” बता रहे हैं।

परिवार को फायदा पहुँचाने का आरोप
आरटीआई एक्टिविस्ट सुनील मुर्मू और जेएलकेएम के कोल्हान प्रभारी राजा कालिंदी का कहना है कि दास ने न केवल खुद को तरक्की दिलाई बल्कि अपने परिजनों के लिए भी नौकरी की व्यवस्था कराई। यहां तक कि अपनी बेटी के लिए विशेष वैकेंसी निकालने की कोशिश की, लेकिन विस्थापितों के विरोध के बाद योजना रोक दी गई।
गवाहों पर दबाव

कंपनी के अधिकारी बताते हैं कि दास का इतना दबदबा है कि लोग उनके खिलाफ खुलकर बयान देने से डरते हैं। उनके भाई गोपीनाथ दास पहले से ही टीए/डीए घोटाले में आरोपी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि गवाही देने से पहले कई बार सोचना पड़ता है।

पद से हटाने की मांग
मजदूर संगठनों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक घोटाले की जांच पूरी नहीं हो जाती, दास को सीएमडी के निजी सहायक पद से हटाया जाए। उनका तर्क है कि इस पद पर रहते हुए निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। साथ ही, दास के पूरे प्रमोशन रिकॉर्ड की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए।

प्रबंधन की चुप्पी
यूसीआईएल प्रबंधन फिलहाल इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है। लेकिन लगातार उठ रहे सवाल कंपनी की छवि पर दाग लगा रहे हैं और मजदूर संगठन पीए पद से हटाने को लेकर धरना-प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

