स्वतंत्रता सेनानी के गाथा पर लेखन का दो दिवसीय कार्यशाला 8 एवं 9 जनवरी
राष्ट्र संवाद संवाददाता
पोटका।आदिवासी भूमिज समाज झारखंड के द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों के गाथा पर लेखन का दो दिवसीय कार्यशाला 8 एवं 9 जनवरी को बिरसा मंच बड़ा सिगदी में आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी आभूस के सलाहकार सिद्धेश्वर सरदार व अध्यक्ष जयपाल सिंह सरदार ने रविवार को प्रेसवार्ता कर पावरु में दिया। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के 8 एवं 9 जनवरी का चयन ऐतिहासिक दृष्टिकोण से किया गया है। 8 जनवरी 1770 को देश के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी सुबल सिंह को निरंकुश ब्रिटिश हुकूमत द्वारा फांसी दे दी गई। सुबल सिंह हमारे जमीन पर अंग्रेजों द्वारा दखल के विरोधी थे। वे स्वशासन के पक्षधर थे। उन्होंने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया, इसलिए अंग्रेजों ने उन्हें मौत की सजा दे दी। 9 जनवरी भी हमारे बिरसा मुंडा जी के द्वारा शुरू उलगुलान दिवस के उपलक्ष्य में रखा गया है। बिरसा मुंडा 9 जनवरी 1894 को खुंटी के अड़की प्रखंड अंतर्गत डूमबारी बुरु में बैठक कर अंग्रेजों के शोषण के खिलाफ उलगुलान शुरू किया गया। इसके विरोध में अंग्रेजों ने भीड़ पर गोली चलाई, जिससे कई लोगों की मौत हो गई थी। इतिहास की जानकारी लिपिबद्ध करने हेतु कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। आदिवासी समुदाय इतिहास को पुख्ता रुप में संजोकर रखने में पीछे है, इसलिए लेखन कार्यशाला से जरुरी है। इस अवसर पर सुदर्शन भूमिज,हरिश सिंह भूमिज,मानिक सरदार, सुखदेव सरदार, राजकिशोर सरदार, सुचित्रा सरदार,मेनसरी सरदार,रिंकी सरदार,बड़ाकुनी सरदार,रायमती सरदार,पानमनी सरदार,सुबला सरदार उपस्थित थी।


