प्रियंका सौरभ
“एचकेआरएनएल कर्मचारियों की अनदेखी: सरकार की नीतियों का शिकार मेहनतकश वर्ग”
जब भी हरियाणा विधानसभा में खाली सरकारी पदों को भरने की मांग उठती है, सरकार इन कर्मचारियों को केवल आंकड़ों की बाजीगरी में इस्तेमाल करती है। सरकार यह दिखाने का प्रयास करती है कि उसने रोजगार उपलब्ध करा दिया है, लेकिन वास्तविकता में इन कर्मचारियों को केवल अल्पकालिक संविदा पर रखा जाता है। सरकार को तुगलकी फरमान वापस लेना चाहिए और इन कर्मचारियों के लिए नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। यदि सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती, तो यह हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डालेगा। एचकेआरएनएल कर्मचारियों को भी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह बीमा, पेंशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
-प्रियंका सौरभ
हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (एचकेआरएनएल) के तहत कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। यह कर्मचारी मेरिट के आधार पर भर्ती तो होते हैं, लेकिन इन्हें न तो उचित वेतन मिलता है और न ही नौकरी की सुरक्षा। सरकार इन्हें एक अस्थायी समाधान के रूप में इस्तेमाल कर रही है, लेकिन इनके अधिकारों की कोई परवाह नहीं की जा रही। एचकेआरएनएल के तहत काम कर रहे कर्मचारी सरकार के लिए सिर्फ एक “अस्थायी समाधान” बनकर रह गए हैं। सरकार इनका उपयोग कर वाहवाही तो बटोर रही है, लेकिन इन्हें स्थायी नौकरी देने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। जब सरकारी विभागों में खाली पदों को भरने की बात होती है, तो इन्हीं कर्मचारियों को दिखाकर सरकार आंकड़े चमकाने में लगी रहती है।
सरकार का तुगलकी फरमान: एचकेआरएनएल कर्मचारियों की नौकरियों पर संकट
हाल ही में सरकार ने एक ऐसा फरमान जारी किया है, जिससे एचकेआरएनएल कर्मचारियों की नौकरियों पर खतरा मंडराने लगा है। सरकार न केवल इन कर्मचारियों को नियमित करने से कतरा रही है, बल्कि अब उन्हें हटाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। यह निर्णय हजारों परिवारों को बेरोजगारी की ओर धकेल सकता है। सरकार ने पहले 58 साल तक सुरक्षा की गारंटी दी थी, लेकिन जनवरी माह में विभिन्न विभागों में कार्यरत सैकड़ों एचकेआरएनएल कर्मचारियों को हटा दिया गया। जब हटाए गए कर्मचारियों ने रोष प्रदर्शन किया, तब भी सरकार ने उनकी एक न सुनी। अब हरियाणा कौशल रोजगार निगम द्वारा वन विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को ईद के पवित्र त्योहार पर बड़ा झटका देते हुए नौकरी से हटा दिया गया। पंचकूला मुख्यालय के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने इन कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी किया है।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने शिक्षा विभाग में कार्यरत सैकड़ों सरप्लस शिक्षकों को भी हटाने का निर्णय लिया है। यह फैसला न केवल शिक्षकों के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि शिक्षा प्रणाली पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। शिक्षक लंबे समय से छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए समर्पित थे, लेकिन अब उनकी नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है।
मुख्य समस्याएँ
एचकेआरएनएल के कर्मचारी नियमित सरकारी कर्मचारियों की तरह ही कार्य करते हैं, लेकिन इन्हें मात्र एक तिहाई वेतन मिलता है। यह स्थिति न केवल आर्थिक रूप से इन कर्मचारियों को कमजोर बना रही है, बल्कि उनके मनोबल को भी गिरा रही है। कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने की समस्या लगातार बनी हुई है। कई बार महीनों तक वेतन अटका रहता है, जिससे वे आर्थिक संकट का सामना करने को मजबूर होते हैं। नियमित कर्मचारियों की तुलना में इन कर्मचारियों से अधिक कार्य लिया जाता है, लेकिन उन्हें कोई स्थायित्व नहीं दिया जाता। नतीजतन, वे हमेशा असुरक्षा के माहौल में कार्य करने को मजबूर रहते हैं। जब भी हरियाणा विधानसभा में खाली सरकारी पदों को भरने की मांग उठती है, सरकार इन कर्मचारियों को केवल आंकड़ों की बाजीगरी में इस्तेमाल करती है। सरकार यह दिखाने का प्रयास करती है कि उसने रोजगार उपलब्ध करा दिया है, लेकिन वास्तविकता में इन कर्मचारियों को केवल अल्पकालिक संविदा पर रखा जाता है। नियमित कर्मचारियों को जहां सभी प्रकार की छुट्टियाँ मिलती हैं, वहीं एचकेआरएनएल के कर्मचारियों को छुट्टियों की सुविधा तक नहीं दी जाती। इसका असर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।
नौकरी छिनने का खतरा
सरकार के नए आदेश के अनुसार, एचकेआरएनएल के कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका है, जिन्होंने वर्षों तक सस्ती मजदूरी पर मेहनत की है। अन्य सरकारी योजनाओं से बाहर रखा जानाइन कर्मचारियों को किसी भी सरकारी लाभ, बीमा, पेंशन या अन्य सुविधाओं का अधिकार नहीं दिया गया है, जिससे इनका भविष्य पूरी तरह से असुरक्षित बना हुआ है। नौकरी की अस्थिरता और भविष्य की अनिश्चितता के कारण कर्मचारियों में भारी मानसिक तनाव देखने को मिल रहा है। यह स्थिति न केवल उनके जीवन स्तर को प्रभावित कर रही है, बल्कि उनके परिवारों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
समाधान के संभावित उपाय
एचकेआरएनएल कर्मचारियों को उनके कार्य के अनुरूप वेतन दिया जाना चाहिए। यह अन्यायपूर्ण है कि वे समान कार्य के लिए नियमित कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम वेतन प्राप्त करें। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि इन कर्मचारियों को वेतन समय पर मिले ताकि वे आर्थिक संकट से बच सकें। जो कर्मचारी लंबे समय से कार्यरत हैं, उन्हें स्थायी करने की नीति बनाई जानी चाहिए। इससे वे अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे और अपने कार्य में और अधिक दक्षता ला सकेंगे। कर्मचारियों पर जरूरत से ज्यादा कार्यभार डालने के बजाय उनके कार्य को नियमित सरकारी कर्मचारियों के कार्य से संतुलित किया जाए। सरकार को आंकड़ों की बाजीगरी छोड़कर वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए और एचकेआरएनएल कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
सरकार को तुगलकी फरमान वापस लेना चाहिए और इन कर्मचारियों के लिए नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। यदि सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती, तो यह हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डालेगा। एचकेआरएनएल कर्मचारियों को भी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह बीमा, पेंशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। यदि सरकार उनकी मांगों को अनसुना करती है, तो इन कर्मचारियों को कानूनी सहारा लेना चाहिए और न्यायालय में अपनी आवाज उठानी चाहिए। यह एक संवैधानिक अधिकार है कि उन्हें उनके श्रम का उचित मूल्य मिले।
आगे की राह
एचकेआरएनएल कर्मचारी सरकार के लिए केवल अस्थायी समाधान बनकर रह गए हैं। उन्हें पूर्णकालिक नौकरी का वादा किया जाता है, लेकिन वास्तविकता में वे एक अनिश्चित भविष्य की ओर धकेले जा रहे हैं। यदि सरकार जल्द ही इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेती, तो ये कर्मचारी विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर हो सकते हैं। न्यायसंगत वेतन, समय पर भुगतान, स्थायीकरण और नौकरी की सुरक्षा जैसी मांगों को सरकार को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि इन कर्मचारियों को उनका हक मिल सके। इसके अलावा, कर्मचारियों को कानूनी कदम उठाने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की भी जरूरत है।
(लेखिका स्वतन्त्र पत्रकार और कवयित्री है।)