अमन शांडिल्य
देश में धन का असमान वितरण कोई नया मुद्दा नहीं है, लेकिन जब केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री नितिन गडकरी जैसे नेता इस असमानता पर खुलकर बोलते हैं, तो यह सत्ता के शीर्ष से आई चेतावनी मानी जानी चाहिए। गडकरी ने कहा कि “अमीर और अमीर, गरीब और गरीब होते जा रहे हैं,” यह बयान केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक असंतुलन का गंभीर संकेत है।
देश की संपत्ति कुछ गिने-चुने हाथों में केंद्रित होती जा रही है, जबकि गरीबों की संख्या में वृद्धि हो रही है। यह स्थिति न केवल आर्थिक विकास की गति को प्रभावित करेगी बल्कि सामाजिक अशांति का कारण भी बन सकती है। सरकार और नीति-निर्माताओं को चाहिए कि वे इस चेतावनी को गंभीरता से लें और नीतियों में ऐसे बदलाव करें जिससे संसाधनों का न्यायसंगत वितरण हो सके।
गडकरी का यह बयान याद दिलाता है कि विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। वरना यह खाई भविष्य में और गहरी होती जाएगी।
