राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा सार्वजनिक मोड दुर्गा पूजा के तत्वाधान से आयोजित अष्टम प्रहर हरि नाम संकीर्तन का सोमवार को धूमधाम से समापन हुई।
इस अवसर पर भक्तों के द्वारा सुबह से ही पूजा अर्चना किया गया एवं एक दूसरे को रंग गुलाल अबीर लगाई गई एवं होली भी खेली गई इस अवसर पर कीर्तन स्थल के मिट्टी भी एक दूसरे को लगाया गया जो काफी पवित्र होता है इसका काफी महत्व होता है।
इस अवसर पर क्षेत्र के सुख समृद्धि के लिए भी कमेटी के सदस्यों के द्वारा कामना किया गया एवं भोग प्रसाद का वितरण भी किया गया।
कीर्तन के समापन पर महंत विदाई एवं पंडित का विदाई भी किया गया।
विभिन्न कीर्तन संप्रदाय को भी विदाई दी गई घर-घर जाकर कीर्तन संप्रदाय के लोगों ने कीर्तन भी किया जिससे सब की सुख समृद्धि बनी रहे।
*कीर्तन के समापन पर* आमतौर पर जादूगोड़ा समेत पूरे भारत में ये परंपराएं निभाई जाती हैं:
*1. आरती*:
कीर्तन पूरा होने के बाद भगवान की आरती की जाती है। “ॐ जय जगदीश हरे”, “आरती कुंजबिहारी की” या “श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी” जैसी आरती गाई जाती है। सब लोग खड़े होकर ताली बजाते हैं।
*2. पुष्पांजलि*:
आरती के बाद भगवान को फूल अर्पित किए जाते हैं और “हरि बोल” का जयकारा लगाया जाता है।
*3. शांति पाठ*:
“ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः…” या “ॐ शांति: शांति: शांति:” का उच्चारण करके विश्व शांति की कामना की जाती है।
*4. प्रसाद वितरण*:
भगवान को भोग लगा हुआ प्रसाद सभी भक्तों में बांटा जाता है। जादूगोड़ा में अक्सर फल प्रसाद में दिया जाता है। प्रसाद ग्रहण करना बहुत शुभ माना जाता हे।
*5. जयकारा*:
अंत में “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥” का संकीर्तन करते हुए और “जगन्नाथ जी की जय”, “राधे-राधे”, “हरि बोल” के जयकारे लगाए जाते हैं।
*6. क्षमा प्रार्थना*:
कई जगह कीर्तन मंडली अंत में भूल-चूक के लिए क्षमा मांगती है: “भूल चूक माफ करना, हरी नाम की

